तब क्या होता जब आप एक वेबसाइट पर जाते हैं?

What Happens When You Visit Website

What Happens When You Visit Website

जबकि आपको किसी वेबसाइट पर जाने के लिए बस एक क्लिक करना होता हैं, लेकिन इसे लोड करने के लिए आवश्यक वास्तविक यात्रा कई हजार मील की होती हैं और इसमें कई लाख डिवाइसेस शामिल हो सकते है।

आज तक आपने पीसी या मोबाइल में सैकड़ों या हजारों वेबसाइटों को ओपन किया होगा, उन्हें पढ़ा होगा या उनमें बैंकिंग जैसे कई सारे काम भी किए होंगे। यदि आप नए हैं या आप इस बारे में थोड़ा अनिश्चित हैं कि वेबसाइट क्या है, तो चिंता न करें। आप पिछली पोस्‍ट – वेब पेज क्या है? वेब पेज का स्‍ट्रक्‍चर कैसा होता हैं? को पढ़कर इसके बारे में बहुत सारी जानकारी ले सकते हैं।

लेकिन यदि आप वेब साइट क्या यह जानते हैं, इंटरनेट क्या हैं यह जानते हैं, तो इसका मतलब यह नहीं हैं की आप वेबसाइटों पर जाने के पीछे की कहानी जानते होंगे।

जब आप किसी वेब साइट को ओपन करते हैं, तो इसकी सैकड़ो या हजारों किलोमिटर की यात्रा के लिए केवल कुछ सेकंड लगते हैं- वेबसाइट को आपके डिवाइस पर लोड होने में उतना ही समय लगता है – लेकिन इन कुछ सेकंड में कई हजार मील की दूरी तय करनी पड़ सकती है। हाँ, सच में कुछ ही सेकंड में कई हजार मील! अब, हम समय को बहुत ही धीमा करेंगे और जानेंगे की जब हम किसी वेबसाइट पर जाना चाहते हैं तो वास्तव में क्या होता है।

जब आप किसी वेबसाइट पर जाते हैं तो पर्दे के पीछे बहुत सी चीजें होती हैं जिनके बारे में आप नहीं जानते होंगे। आइए उन चीजों की एक सूची से गुजरते हैं, जो उस क्रम में होती हैं:

 

What Happens When You Visit Website

आप एक URL एंटर करें

बेशक, एक वेबसाइट पर नेविगेशन तब शुरू होता है जब कोई यूजर इसे शुरू करता है। आमतौर पर, आप अपने Browser के एड्रेस बार पर क्लिक करेंगे और google.com या facebook.com जैसे एड्रेस डालेंगे। इसे हम एक URL कहते हैं, जो Uniform Resource Locator है। एक URL एक वेबसाइट के पते के लिए एक मानव-अनुकूल नाम है।

Web Address क्या है? यूआरएल कैसे काम करता है?

 

अनुरोध

आपको यह पता होना चाहिए की, इंटरनेट मूल रूप से क्लाइंट-सर्वर मॉडल के अनुसार काम करता है। कल्पना करें कि हॉटेल में आप चाय की ऑर्डर दे रहे हैं। आप चाय के लिए काउंटर के पीछे वाले व्यक्ति से पूछते हैं और वह आपको देता है। वेबसाइटों के लिए भी यही बात सही है, जो वास्तव में सर्वर नामक डिवाइस होते है।

ये सर्वर दुनिया में कहीं भी हो सकते हैं। जब भी आप किसी वेबसाइट पर जाना चाहते हैं, तो आपका डिवाइस एक रिक्‍वेस्‍ट बनाता है जिसे सर्वर को भेजा जाएगा।

वेब अलग-अलग तकनीकों का एक बंच है, लेकिन इसकी दो अवधारणाएँ हैं, जिनका मूल कार्य आज भी अनसुलझा है। वेब ब्राउज़र, और वेब सर्वर। ये “पुराने” क्लाइंट / सर्वर मॉडल पर काम करते हैं जो निम्न है: एक क्लाइंट एक एड्रेस (एक IP या एक नाम) का उपयोग करके सर्वर से कनेक्‍ट  होता है, और कुछ अनुरोध करता है। सर्वर, फिर क्लाइंट को प्रतिक्रिया करता है और तरह से आगे बढ़ता हैं।

क्लाइंट सर्वर से कनेक्ट होते हैं, लेकिन आसपास के अन्य तरीके से नहीं। हालाँकि, आज की वेब तकनीक ने इस मॉडल में महत्वपूर्ण बदलाव किया है, हम इस प्रक्रिया को सरल तरीके से समझाने के लिए इसका उपयोग करेंगे।

तो, आप अपने पसंदीदा ब्राउज़र में एक वेब एड्रेस एंटर करते हैं और एक वेबपेज पर जाते हैं। जब आप अपने किबोर्ड से एंटर की प्रेस करते हैं और अंत में पेज को डिस्‍प्‍ले होते हुए देखते हैं, इसके बीच, निम्नलिखित चीजें होती हैं:

 

आपका ब्राउज़र वेबसाइट के IP Address को खोजने के लिए DNS का उपयोग करता है

उपरोक्त लाइन में कुछ संक्षिप्त रूप हो सकते हैं जो आपके लिए अपरिचित हैं – चिंता न करें! नीचे की में उन्हें समझाया गया हैं।

IP एड्रेस क्या होता है? एक शॉर्ट गाइड आईपी एड्रेस के बारे में सब कुछ जानने के लिए

DNS Domain Name Server क्या है? यह कैसे काम करता हैं?

एक बार जब आप अपने ब्राउज़र में एड्रेस टाइप करने के बाद एंटर दबाते हैं, तो आपको उस साइट का IP एड्रेस देखना होगा जिसे आप देखना चाहते हैं। एक IP (Internet Protocol) एड्रेस बस एक यूनिक, कंप्यूटर के अनुकूल एड्रेस है जिसका उपयोग वेबसाइट खोजने के लिए किया जाता है। आमतौर पर, ये 182.45.160.15 की तरह, अंकों के चार सेट द्वारा अलग किए गए होते हैं।

हालाँकि, इसके बीच में एक स्‍टेप है। याद रखें जब आपने facebook.com को पहले एंटर किया था? लेकिन यह भाषा कंप्यूटर को समझ में नहीं आती और वह इसके साथ कुछ नहीं कर सकता है; इसे IP एड्रेस में ट्रांसलेट करने की आवश्यकता है। यह DNS, या Domain Name System नामक किसी चीज से पूरा होता है।

सरल शब्दों में, DNS मानव-अनुकूल URL (जैसे facebook.com) को कंप्यूटर के अनुकूल IP एड्रेस (173.75.17.52) में ट्रांसलेट करता है। इस बात पर निर्भर करते हुए कि आपने हाल ही में इस वेबसाइट को ओपन किया है, आपका ब्राउज़र आपके कंप्यूटर या इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर (ISP) सहित कई स्रोतों से इस DNS जानकारी को पा सकता है।

DNS के बिना, आपको वेबसाइट के नामों के बजाय IP एड्रेस की लिस्‍ट को याद रखना होगा, जो आपके लिए संभव नहीं हैं! मेरे लिए भी नहीं!

 

DNS प्राप्त करना

Facebook.com के लिए, सबसे पहले, DNS रिकार्सर, root name server से संपर्क करेगा। Root name server इसे .com डोमेन नाम सर्वर पर रीडायरेक्ट करेगा। .com नाम सर्वर इसे facebook.com नाम सर्वर पर पुनर्निर्देशित करेगा। facebook.com नेम सर्वर अपने ‘DNS’ रिकॉर्ड्स में facebook.com के लिए मेल खाने वाले IP एड्रेस को खोजेगा और इसे अपने DNS रिकार्सर को लौटाएगा जो इसे आपके ब्राउज़र में वापस भेज देगा।

इन अनुरोधों को छोटे डेटा पैकेटों का उपयोग करके भेजा जाता है, जिसमें रिक्‍वेस्‍ट की सामग्री और IP एड्रेस की जानकारी होती है, जो इसके लिए नियत है (DNS रिकर्सर का IP एड्रेस)। ये पैकेट सही DNS सर्वर तक पहुँचने से पहले क्लाइंट और सर्वर के बीच कई नेटवर्किंग डिवाइसेस के माध्यम से यात्रा करते हैं। यह डिवाइसेस यह एड्रेस लगाने के लिए राउटिंग टेबल का उपयोग करता है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पैकेट किस तरह से अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए सबसे तेज़ संभव तरीका कौनसा है। यदि ये पैकेट खो जाते हैं, तो आपकी रिक्‍वेस्‍ट विफल हो जाएगी। अन्यथा, वे सही DNS सर्वर तक पहुंच जाएंगे, सही IP एड्रेस को पकड़ लेंगे, और अपने ब्राउज़र पर वापस आ जाएंगे।

क्या आप जानते हैं कि, पैकेट एक देश से दूसरे देश में कैसे जाता है? पूरी दुनिया में इंटरनेट हब को जोड़ने वाले तारों का एक विशाल नेटवर्क है। ये तार भूमि, समुद्र और यहां तक ​​कि पूरे महासागरों के विस्तार को पार करते हैं! ये सभी तार फाइबर ऑप्टिक केबल हैं, जो प्रकाश की गति से डेटा ट्रांसफर कर सकते हैं! हाँ, वे बहुत फास्‍ट हैं।

 

ब्राउज़र सर्वर के साथ एक TCP कनेक्शन शुरू करता है।

एक बार ब्राउज़र सही IP एड्रेस प्राप्त कर लेता है, तो यह उस सर्वर के साथ एक कनेक्शन का निर्माण करेगा जो इनफॉर्मेशन को ट्रांसफर करने के लिए IP एड्रेस से मेल खाता है। ऐसे कनेक्शन बनाने के लिए ब्राउज़र इंटरनेट प्रोटोकॉल का उपयोग करते हैं। कई अलग-अलग इंटरनेट प्रोटोकॉल हैं जिनका उपयोग किया जा सकता है लेकिन किसी भी प्रकार के HTTP अनुरोध के लिए TCP सबसे आम प्रोटोकॉल है।

आपके कंप्यूटर (क्लाइंट) और सर्वर के बीच डेटा पैकेट को ट्रांसफर करने के लिए, TCP कनेक्शन स्थापित होना महत्वपूर्ण है। यह कनेक्शन TCP / IP थ्री-वे हैंडशेक नामक एक प्रक्रिया का उपयोग करके स्थापित किया जाता है। यह एक तीन चरण की प्रक्रिया है जहां क्लाइंट और सर्वर एक संबंध स्थापित करने के लिए SYN (synchronize) और ACK (acknowledge) मैसेजेज का आदान-प्रदान करते हैं।

 

ब्राउज़र वेब सर्वर के लिए एक HTTP अनुरोध भेजता है।

TCP कनेक्शन स्थापित हो जाने के बाद, डेटा ट्रांसफर शुरू करने का समय आ गया है! ब्राउज़र facebook.com वेब पेज के लिए एक GET अनुरोध भेजेगा। यदि आप क्रेडेंशियल एंटर कर रहे हैं या कोई फ़ॉर्म सबमिट कर रहे हैं तो यह एक POST अनुरोध हो सकता है। इस अनुरोध में अतिरिक्त जानकारी भी होगी जैसे कि ब्राउज़र पहचान (User-Agent header),  अनुरोधों के प्रकार जो इसे स्वीकार करेंगे (Accept header), और कनेक्शन हेडर इसे अतिरिक्त अनुरोधों के लिए TCP कनेक्शन को जीवित रखने के लिए कहेंगे। यह कुकीज़ से ली गई जानकारी को भी पास कर देगा जो इस डोमेन के लिए स्टोर में है।

 

सर्वर अनुरोध को संभालता है और प्रतिक्रिया भेजता है।

सर्वर में एक वेब सर्वर (यानी Apache, IIS) होता है जो ब्राउज़र से अनुरोध प्राप्त करता है और एक प्रतिक्रिया हैंडलर को पढ़ने और प्रतिक्रिया उत्पन्न करने के लिए इसे पास करता है। अनुरोध हैंडलर एक प्रोग्राम (ASP.NET, PHP, Ruby, आदि में लिखा गया है) जो अनुरोध, उसके हेडर और कुकीज़ को पढ़ता है, यह जांचने के लिए कि क्या अनुरोध किया जा रहा है और जरूरत पड़ने पर सर्वर पर जानकारी भी अपडेट करता हैं। फिर यह एक विशेष फॉर्मेट (JSON, XML, HTML) में एक प्रतिक्रिया को इकट्ठा करेगा।

 

सर्वर एक HTTP प्रतिक्रिया भेजता है।

सर्वर प्रतिक्रिया में आपके द्वारा अनुरोधित वेब पेज के साथ-साथ स्‍टेटस कोड, कंप्रेशन टाइम (Content-Encoding), पेज को कैश कैसे करें (Cache-Control), सेट करने के लिए कोई भी कुकीज़, प्राइवेसी इनफॉर्मेशन आदि।

 

ब्राउज़र HTML सामग्री (HTML प्रतिक्रियाओं के लिए जो सबसे आम है) प्रदर्शित करता है।

ब्राउज़र चरणों में HTML सामग्री प्रदर्शित करता है। सबसे पहले, यह HTML के कंकाल को प्रस्तुत करेगा। फिर यह HTML टैग्स की जाँच करेगा और वेब पेज पर अतिरिक्त एलिमेंट के लिए GET अनुरोध भेजता है, जैसे कि इमेजेज, CSS स्टाइलशीट, जावास्क्रिप्ट फ़ाइलें आदि। ये स्‍टेबल फ़ाइलें ब्राउज़र द्वारा कैश की जाती हैं, इसलिए अगली बार जब आप इस पेज पर जाएँ तो इसे फिर से लोड होना नहीं पड़ता। अंत में, आपको अपने ब्राउज़र पर facebook.com दिखाई देगा।

बस!

 

चक्र जारी रहता है

वेबपेज डाउनलोड करने के बाद, आपके ब्राउज़र की यात्रा समाप्त नहीं हुई है। यदि आप एक नई लिंक पर क्लिक करते हैं, तो यह सारे स्‍टेप्‍स फिर से शुरू होते हैं। और यदि आप पेज पर कुछ जानकारी (जैसे Google पर सर्च क्वेरी) भेजते हैं, तो यह कुछ कार्रवाई करने के लिए उस क्वेरी का उपयोग करता है।

पेज के आधार पर, आपका ब्राउज़र आपके द्वारा अधिक जानकारी भेजने से पहले बैकग्राउंड में सर्वर के साथ इंटरैक्ट भी कर सकता है। उदाहरण के लिए, जब आप किसी वेबसाइट के लिए साइन अप करते हैं और आपको अपना पासवर्ड दो बार टाइप करना होता है, तो कई पेज आप Enter दबाने से पहले आपको बताएंगे कि उनका मिलान नहीं हुआ हैं।

आपने उस वेबसाइट पर क्लिक किया जिसे आप देखना चाहते थे! आपकी वेबसाइट को उन कुछ सेकंड के भीतर एक्सेस करने के लिए पर्दे के पीछे कि जाने वाली प्रक्रिया बस चौंका देने वाली है। भले ही आप दुनिया में कहीं भी हों, एक औसत इंटरनेट स्पीड आपकी वेबसाइट को कुछ ही सेकंड में लोड और डिलीवर कर देगी। यह आधुनिक विज्ञान का चमत्कार है।

तो अगली बार जब आप वेबसाइट लिंक पर क्लिक करते हैं तो इस उल्लेखनीय यात्रा को याद रखें!

वास्तव में तब क्या होता है जब आप अपने पीसी को चालू करते हैं?

Summary
तब क्या होता जब आप एक वेबसाइट पर जाते हैं?
Article Name
तब क्या होता जब आप एक वेबसाइट पर जाते हैं?
Description
जबकि आपको किसी वेबसाइट पर जाने के लिए बस एक क्लिक करना होता हैं, लेकिन इसे लोड करने के लिए आवश्यक वास्तविक यात्रा कई हजार मील की होती हैं और इसमें कई लाख डिवाइसेस शामिल हो सकते है।
Author
Publisher Name
IT Khoj
Publisher Logo