SMPS Hindi में! SMPS क्‍या हैं? SMPS कैसे काम करता हैं?

SMPS Hindi.

SMPS Hindi

SMPS Full Form

Full Form of SMPS is – Switched-Mode Power Supply

 

SMPS Full From in Hindi:

SMPS का फुल फॉर्म – स्विच मोड पॉवर सप्‍लाई हैं।

 

SMPS Meaning in Hindi:

SMPS का मतलब Switched-Mode Power Supply हैं। इसके साथ ही इसे Switching-Mode Power Supply, Switch-Mode Power Supply, Switched Power Supply, SMPS, या Switcher के रूप में भी जाना जाता हैं।

 

SMPS in Hindi:

SMPS एक इलेक्ट्रॉनिक पॉवर सप्‍लाई है जो कुछ तरह के स्विचिंग डिवाइसेस का उपयोग करता है ताकि सोर्स से लोड के लिए इलेक्‍ट्रीकल एनर्जी ट्रांसफर हो सके। आमतौर पर सोर्स AC या DC होता है और लोड DC होता है।

अन्‍य पावर सप्‍लाई की तरह, SMPS सोर्स (अक्सर मेन पावर) के DC या AC को DC लोड में ट्रांसफर करता हैं जैसे कि पर्सनल कंप्‍यूटर।

SMPS हमेशा इनपुट वेरिएशंस के बावजूद, लोड को अच्छी तरह रेगुलेटेड पावर प्रोवाइड करते हैं।

 

SMPS Kya Hai in Hindi:

SMPS का सबसे आम एप्‍लीकेशन कंप्यूटर के लिए पावर सप्‍लाई यूनिट के रूप में किया जाता हैं। कंप्‍यूटर में उनकी हाई एफिशिएंसी, कम लागत और हाई पावर डेनसिटी के कारण पावर सप्‍लाई एक स्‍टैंडर्ड टाइप बन गया हैं।

निम्न इमेजेस डेस्कटॉप कंप्यूटर के SMPS के है-

Computer SMPS in Hindi

पावर सप्‍लाई युनिट, इलेक्ट्रिक सर्किट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है क्योंकि यह एक प्रॉपर ऑपरेशन के लिए सर्किट को पावर प्रदान करता है। लगभग सभी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस को किसी भी उतार चढ़ाव के बिना एक निरंतर वोल्टेज की आवश्यकता होती है।

पावर सप्‍लाई आपके घर या ऑफिस के अनियमित मुख्‍य पावर के इनपूट को एक स्‍टेबल रेगुलेटेड पावर में बदल देता हैं। जिससे आपके घर या ऑफिस के कंप्‍यूटर और अन्‍य इलेक्‍ट्रॉनिक डिवासेस सुरक्षित रहते हैं।

 

Types of Power Supply in Hindi:

मूल रूप से दो प्रकार के पावर सप्लाई हैं: Linear Regulated Power Supply और Switching Mode Power Supply (SMPS)

 

1) Linear Regulated Power Supply:

Linear Regulated Power Supply, सिरिज पास कंट्रोल एलिमेंट की मदद से आउटपुट वोल्टेज को रेगुलेट करता है। सिरिज पास एलिमेंट का बेसिक उदाहरण resistor है। लेकिन एक्टिव या Linear Mode मोड में अक्सर उपयोग किए जाने वाले सिरिज पास एलिमेंट BJT या MOSFET हैं और वे लोड के साथ सिरिज में कनेक्‍ट होते है।

 

2) SMPS:

SMPS एक प्रकार का रेगुलेटेड पावर सप्‍लाई है जो हाई फ्रिक्‍वेंसी स्विचिंग रेगुलेटर का इस्‍तेमाल कर पावर सप्‍लाई को कन्‍वर्ट करता हैं और इसके साथ ही अत्यधिक कुशल तरीके से आउटपूट को रेगुलेट करता हैं।

स्विचिंग रेगुलेटर भी Linear Regulator की तरह एक ट्रांजिस्टर (एक पावर MOSFET की तरह) है लेकिन अंतर यही है कि SMPS में पास ट्रांजिस्टर लगातार पूरी तरह से ON स्‍टेट में नहीं रहता, बल्कि हाई फ्रिक्‍वेंसी पर पूरी तरह से ON और पूरी तरह से OFF स्‍टेट के बीच स्विच करता है। इसलिए इसका नाम Switching Mode Power Supply हैं।

जबकि स्विचिंग एलिमेंट का ऐवरेज टाइम बहुत कम होता हैं, मतलब ट्रांसिस्‍टर एक्टिव स्‍टेट में बहुत कम समय होता हैं, तो Linear Regulators के मुकाबले हिट के रूप में पावर कम बर्बाद होता हैं। यह SMPS को हाई एफिशिएंट बनाता हैं, क्योंकि पास ट्रांजिस्टर (या स्विचिंग एलिमेंट) के वोल्टेज ड्रॉप बहुत कम है।

ट्रांजिस्टर की स्विचिंग एक्‍शन Pulse Width Modulation (PWM) टेक्निक का उपयोग करके कंट्रोल किया जाता हैं और आउटपूट वोल्‍टेज को PWM के डयुटी साइकिल से रेगुलेट किया जाता हैं।

SMPS-Structure in Hindi

यह इमेज SMPS युनिट का एक बेसिक स्‍ट्रक्‍चर हैं। इसमें, अनरेगुलेटेड DC सप्‍लाई, Switched Mode DC से DC Chopper Circuit को दिया जाता हैं और आउटपूट रेगुलेटेड DC सप्‍लाई होता हैं।

 

Inside SMPS:

SMPS में चार कंपोनेंट महत्‍वपूर्ण है-

Input rectifier, Inverter, Voltage converter, Output regulator और Output regulator

Indide SMPS in Hindi

1) Input rectifier:

SMPS में, DC में कन्‍वर्ट करने से पहले मेन सप्‍लाई से AC इनपूट को rectifier से rectified किया जाता हैं। Rectifier के full wave diode bridge या module होते हैं जो अनरेगुलेटेड DC वोल्‍टेज को स्‍मुथ कैपेसिटर को प्रोडयुस करता हैं। Rectifier में इनपूट AC पास होता हैं जिसमें AC वोल्‍टेज पल्‍स होते हैं जो पावर फैक्‍टर को कम कर सकते हैं। इसलिए कंट्रोल टेक्निक का इस्‍तेमाल एवरेज इनपूट करंट को साइन वेव फालो करने के लिए फोर्स किया जाता हैं।

 

2) Inverter:

Power oscillator का उपयोग करके रेक्टिफाइड DC को AC में कन्‍वर्ट किया जाता हैं। Power oscillator में एक छोटा आउटपूट ट्रांसफॉर्मर होता हैं, जिसमें 20-100 kHz फ्रिक्‍वेंसी कि कुछ वाइंडिंग होती हैं।

 

3) Voltage converter:

इस स्‍टेज में, एक हाई फ्रिक्‍वेंसी ट्रांसफॉर्मर और इनर्वटेड AC उसके प्राइमरी वाइंडींग को ड्राइव करते हैं। यह आउटपूट पर अप और डाउन वोल्‍टेज क्रिएट करते हैं। जब DC कि जरूरत होती हैं, तब आउटपूट AC को DC में rectifier circuit के Silicon diodes या Schottky diodes का उपयोग कर कन्‍वर्ट किया जाता हैं।

 

4) Output regulator:

आउटपुट स्‍टेज हमेशा एक फिडबैक सिस्‍टम का उपयोग करके एक रेफसेंस वोल्टेज के साथ तुलना करके आउटपुट वोल्टेज को मॉनिटर करता है। सुरक्षा कारणों से, कंप्यूटर के SMPS में दिखाए गए अनुसार optoisolator द्वारा आउटपुट स्‍टेज अलग किया गया है। कुछ SMPS में, ओपन लूप रेगुलेशन का प्रयोग फीडबैक सर्किट के बिना किया जाता है और ट्रांसफार्मर इनपुट के लिए लगातार वोल्टेज को फिड किया जाता है।

फीडबैक सर्किट को पावर जनरेट करने से पहले रन होने के लिए पावर की ज़रूरत होती है, इसलिए स्टैंडबाय के लिए अतिरिक्त नॉन-स्विचिंग पावर-सप्लाई जोड़ा जाता है।

 

SMPS का क्या उद्देश्य है?

अधिकांश जगह पर मुख्‍य इलेक्ट्रिकल सप्‍लाई या तो अधिक या बहुत कम होता हैं और यह स्थिर नहीं रहता। इसलिए आपके इलेक्‍ट्रॉनिक डिवाइसेस कि सुरक्षा के लिए SMPS रेगुलेटेड आउटपूट प्रोवाइड करता हैं।

 

Advantages / Disadvantages  SMPS in Hindi:

हर एक टेक्‍नोलॉजी के अपने advantages और disadvantages होते हैं। यही बात एक SMPS के लिए भी सही हैं।

 

Advantages of SMPS in Hindi:

High efficiency:   स्विचिंग एक्शन का मतलब है कि सिरिज रेगुलेटर एलिमेंट या तो On या Off है और इसलिए कम एनर्जी हिट के रूप में नष्ट होती है और बहुत हाई एफिशिएंसी लेवल प्राप्त किया जा सकता है।

 

Compact: हाई एफिशिएंसी और कम हिट के अपव्यय के परिणामस्वरूप स्विच मोड पावर सप्‍लाई को अधिक कॉम्पैक्ट बनाया जा सकता है।

 

Flexible technology:   स्विच मोड पावर सप्‍लाई टेक्‍नोलॉजी, वोल्टेज स्‍टेप-अप या Boost ऐप्‍लीकेशन या स्‍टेप-डाउन या Buck ऐप्‍लीकेशन में हाई वोल्टेज कन्वर्श़न्ज़ प्रोवाइड करता हैं।

 

Disadvantages of SMPS in Hindi:

Noise:   स्विच मोड पावर सप्लाई पर स्विचिंग एक्शन से होने वाली क्षणिक स्पाइक सबसे बड़ी समस्या है। SMPS जो पावर करता हैं वह स्पाइक सर्किट के सभी एरियाज में माइग्रेट कर सकते हैं यदि स्पाइक ठीक से फ़िल्टर्ड नहीं हैं। इसके अतिरिक्त स्पाइक या ट्रांसमिनेटर्स, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक या RF इंटरफेरेंस का कारण बन सकते हैं जिसका असर अन्‍य नज़दीकी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस पर हो सकता हैं, खासकर अगर वे रेडियो सिग्नल रिसिव करते हैं।

 

Costs:   किसी भी इलेक्‍ट्रॉनिक डिवाइसेस के लिए SMPS लगाने से उसकी लागत बढ़ जाती हैं।

 

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