OSI Model Hindi में! कैसे समझें (और याद रखें) OSI Model के 7 Layers को

OSI Model Hindi.

 

OSI Full Form:

Full Form of OSI is –

Open Systems Interconnection

 

Meaning of OSI in Hindi:

OSI का अर्थ Open Systems Interconnection हैं।

 

OSI in Hindi:

OSI Model Hindi

OSI मॉडल दर्शाता है कि डेटा कम्युनिकेशन्स कैसे होना चाहिए। यह फंक्शन्स या प्रोसेस को सात ग्रुप में विभाजित करता है जिन्हें लेयर के रूप में डिस्‍क्राइब किया जाता है।

Open Systems Interconnection (OSI) मॉडल लेयर में प्रोटोकॉल को इम्प्लीमेंट करने के लिए एक नेटवर्किंग फ्रेमवर्क को डिफाइन करता है, जिसमें एक लेयर से लेकर अगले तक कंट्रोल को पास किया जाता है। यह कंप्यूटर नेटवर्क आर्किटेक्चर को लॉजिकल प्रोग्रेस में 7 लेयर में विभाजित करता है। निचली लेयर इलेक्ट्रिकल सिग्‍नल, बाइनरी डेटा के सेगमेंट, और नेटवर्क में इस डेटा का राउटिंग से डिल करता हैं। नेटवर्क रिक्‍वेस्‍ट और रिस्‍पॉंड,  डेटा का रिप्रेजेंटेशन, और नेटवर्क प्रोटोकॉल जैसे कि यूजर्स के दृष्टिकोण से देखा जाता है उसे हाइर लेयर कवर करता हैं।

Open Systems Interconnection (OSI) रेफरेंस मॉडल ने 1984 में स्थापना के बाद से कंप्यूटर नेटवर्किंग के सबसे बेसिक एलिमेंट के रूप में सर्व किया है। OSI Reference Model, International Standards Organization (ISO) द्वारा डेवलप प्रपोजल पर आधारित है। OSI मॉडल का मूल उद्देश्य इक्विपमेंट मैनुफक्चरर्स के लिए डिजाइन स्‍टैंडर्ड का एक सेट प्रदान करना था ताकि वे एक दूसरे के साथ कम्यूनिकेट कर सकें।

 

History of OSI Model in Hindi:

1970 के दशक के अंत में, एक प्रोजेक्ट को International Organization for Standardization (ISO) द्वारा प्रशासित किया गया था, जबकि दूसरा इंटरनेशनल टेलीग्राफ एंड टेलिनल कंसल्टेंसी कमेटी (CCITT) ने किया था। इन दोनों इंटरनेशनल स्‍टैंडर्ड बॉडिज ने एक ऐसा नेटवर्क डेवलप किया जिसने समान नेटवर्किंग मॉडल को डिफाइन किया।

1983 में, इन दो डयॉक्‍युमेंट को मर्ज किया गया और उसे Open Systems Interconnection का बेसिक रेफरेंस मॉडल नाम दिया गया। यह स्‍टैंडर्ड आमतौर पर Open Systems Interconnection Reference Model, जिसे OSI Reference Model, या बस OSI मॉडल के रूप में जाना जाता है को रेफर करता हैं।

इसे 1984 में दोनों, ISO ने standard ISO 7498 के रूप में और CCITT (जिसे अब Telecommunications Standardization Sector of the International Telecommunication Union or ITU-T के नाम से जाना जाता हैं) ने standard X.200 के रूप में पब्लिश किया गया।

OSI के दो प्रमुख कंपोनेंट्स थे, नेटवर्किंग का ऐब्स्ट्रैक्ट मॉडल, जिसे बेसिक रेफरेंस मॉडल या सेवन-लेयर मॉडल कहा जाता है, और स्पेसिफिक प्रोटोकॉल का एक सेट।

 

Purpose Of The OSI Reference Model in Hindi:

OSI Reference Model का उद्देश्य:

हर कोई जानता है कि इनफॉर्मेशन को टुकड़ों में बाटने से समझने और समझाने में आसानी होती हैं। यही बात नेटवर्किंग के लिए भी लागू होती हैं।

OSI मॉडल सात लेयर के एक स्ट्रक्चर्ड सेट को रिप्रेजेंट करता हैं, जो एक दूसरे के साथ कनेक्‍ट होते है। इस मॉडल में प्रत्येक लेयर को डिवाइसेस, कंप्यूटर और नेटवर्क सेग्मेंट्स को कनेक्‍ट करने की क्षमता बनाए रखने के लिए डेवलप किया गया था।

निम्नलिखित उद्देश्यों के लिए OSI मॉडल बनाया गया था: –

सॉफ्टवेयर डेवलपर्स और हार्डवेयर के लिए एक कॉमन प्लेटफ़ॉर्म बनाना, ताकि ऐसे नेटवर्किंग प्रॉडक्‍ट के निर्माण को प्रोत्साहित किया जा सके जो नेटवर्क पर एक दूसरे के साथ कम्यूनिकेट कर सकते हैं।

छोटे सेग्मेंट्स में बड़ी डेटा एक्‍सचेंज प्रोसेस को विभाजित करके नेटवर्क एडमिनिस्ट्रेटर्स को सहायता करने के लिए यह लेयर बनाए गए हैं। छोटे सेग्मेंट्स समझने, मैनेज करने और ट्रबलशूट के लिए आसान है। लेयर्स में डिवाइड होने से केवल वही डिवाइसेस को ट्रबलशूट करना होगा जो फॉल्टी लेयर में काम कर रहे हैं।

OSI रेफरेंस मॉडल का उद्देश्य वेंडर्स और डेवलपर्स को मार्गदर्शन करना है ताकि डिजिटल कम्युनिकेशन प्रॉडक्‍ट और सॉफ्टवेयर प्रोग्राम तैयार किए जा सकें, और कम्युनिकेशन टूल्‍स के बीच स्पष्ट तुलना की सुविधा प्रदान कि जा सकें। टेलीकम्युनिकशन्स में शामिल अधिकांश विक्रेता, OSI मॉडल के संबंध में अपने प्रॉटक्‍ट और सर्विसेस का वर्णन करने का प्रयास करते हैं। यद्यपि डिस्कशन और मूल्यांकन मार्गदर्शन के लिए OSI मॉडल उपयोगी है, लेकिन OSI शायद ही कभी लागू किया जाता है, क्योंकि कुछ नेटवर्क प्रॉडक्‍ट या स्‍टैंडर्ड टूल्‍स सभी रिलेटेड फंक्‍शन को मॉडल से संबंधित सभी डिफाइन लेयर में एक साथ रखते हैं।

मॉडल एक विशेष नेटवर्किंग सिस्टम के साथ क्या चल रहा है इसका एक दृश्य विवरण देने के लिए लेयर का उपयोग करता है। यह नेटवर्क मैनेजर्स और कंप्‍यूटर प्रोग्रामर्स को समस्या को कम करने में मदद कर सकता है।

 

Feature of OSI Model in Hindi:

नेटवर्क पर कम्युनिकेशन की बड़ी तस्वीर इस OSI मॉडल के माध्यम से समझी जा सकती है।

हम देखते हैं कि हार्डवेयर और सॉफ़्टवेयर एक साथ कैसे काम करते हैं।

हम नई टेक्नोलॉजीज को समझ सकते हैं, जब वे डेवलप होती हैं।

अलग-अलग नेटवर्कों द्वारा ट्रबलशूटिंग आसान हो जाता है।

विभिन्न नेटवर्क पर बेसिक फंक्‍शनल रिलेशनशिप कि तुलना करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

 

The 7 Layers of the OSI in Hindi:

OSI के लेयर अवधारणात्मक रूप से समान फंक्‍शन का एक संग्रह है जो इसके ऊपर की लेयर को सर्विस प्रदान करती है और नीचे कि लेयर से सर्विस को प्राप्त करती है।

OSI का मुख्य कांसेप्‍ट यह है कि टेलीकम्युनिकशन्स नेटवर्क में दो एंडपॉइंट के बीच कम्युनिकेशन की प्रोसेस को संबंधित फंक्‍शन के सात अलग-अलग लेयर में डिवाइड किया जा सके। प्रत्येक कम्युनिकेटिंग यूजर या प्रोग्राम उस कंप्यूटर पर है जो फ़ंक्शन के उन सात लेयर प्रदान कर सकता है। इसलिए यूजर्स के बीच किसी दिए गए मैसेजेस में, सोर्स कंप्यूटर में लेयर्स के माध्यम से डेटा फ्लो नीचे कि और होता हैं और फिर रिसिविंग कंप्यूटर में लेयर्स के माध्यम से ऊपर कि और होता हैं।

फ़ंक्शन के सात लेयर ऐप्‍लीकेशन, ऑपरेटिंग सिस्टम, नेटवर्क कार्ड डिवाइस ड्राइवरों और नेटवर्किंग हार्डवेयर के कॉम्बिनेशन द्वारा प्रोवाइड किए जाते हैं जो एक नेटवर्क केबल या वाई-फाई या अन्य वायरलेस प्रोटोकॉल पर सिग्नल भेजने के लिए सक्षम होते हैं।

OSI मॉडल में, कंट्रोल एक लेवल से दूसरे तक, एक स्टेशन पर ऐप्‍लीकेशन लेयर (लेयर 7) से शुरू होता है, और नीचे की तरफ जाता है, चैनल पर अगले स्टेशन पर जाता है और हाइरार्की का बैकअप लिया जाता है। OSI मॉडल इंटर-नेटवर्किंग के टास्‍क को लेता है और इसे उस हिस्से में विभाजित करता है जिसे वर्टीकल स्टैक के रूप में रेफर किया जाता है जिसमें निम्नलिखित 7 लेयर शामिल हैं-

OSI Model Hindi

 

1) Physical Layer in Hindi:

OSI रेफरेंस मॉडल की सबसे नीचे कि लेयर Physical Layer है। यह डिवाइसेस के बीच वास्तविक फिजिकल कनेक्शन के लिए ज़िम्मेदार है। Physical Layer में बिट्स के रूप में इनफॉर्मेशन होती है। यह डिवाइसेस के बीच वास्तविक फिजिकल कनेक्शन के लिए ज़िम्मेदार है। डेटा प्राप्त करते समय, इस लेयर को सिग्‍नल प्राप्त होते हैं। इसके बाद यह लेयर इसे 0 और 1 में कनवर्ट करता हैं और उन्हें Data Link layer पर भेज देता हैं।

Physical Layer के उदाहरणों में ईथरनेट केबल्स और टोकन रिंग नेटवर्क शामिल हैं इसके अतिरिक्त, हब और अन्य रिपिटर्स स्‍टैंडर्ड नेटवर्क डिवाइस होते हैं जो कि Physical Layer पर कार्य करते हैं, जैसे केबल कनेक्टर हैं।

Physical Layer पर, फिजिकल मेडियम द्वारा सपोर्टेड सिग्‍नल के टाइप का उपयोग करके डेटा ट्रांसमिट किया जाता है: इलेक्ट्रिक वोल्टेज, रेडियो फ्रीक्वेंसी, या इंफ्रारेड या आर्डिनरी लाइट के पल्‍स।

 

Key Points of Physical Layer:

  • यह फिजिकल कनेक्शन को एक्टिवेट करता है, मेंटेन रखता है और डिएक्टिवेट करता है।
  • यह नेटवर्क पर अनस्ट्रक्चर्ड रॉ डेटा के ट्रांसमिशन और रिसेप्शन के लिए जिम्मेदार है।
  • ट्रांसमिशन के लिए आवश्यक वोल्टेज और डाटा रेट फिजिकल लेयर में डिफाइन किए जाते है।
  • यह डिजिटल सिग्नल या ऑप्टिकल सिग्नल में डिजिटल / एनालॉग बिट्स को कन्‍वर्ट करता है।
  • डाटा एन्कोडिंग भी इस लेयर में किया जाता है।

 

2) Data Link Layer in Hindi:

Physical layer से डेटा प्राप्त करते समय, Data Link layer फिजिकल ट्रांसमिशन एरर को चेक करता हैं और बिट्स को डेटा “फ़्रेम” में पैकेट करता है। Data Link layer ईथरनेट नेटवर्क के लिए मैक एड्रेस जैसे फिजिकल एड्रेसिंग स्किम को मैनेज भी करता है, फिजिकल मेडियम के लिए किसी भी विभिन्न नेटवर्क डिवाइसेस के एक्‍सेस को कंट्रोल करता है।

चूंकि Data Link layer, OSI मॉडल में एक सबसे कॉम्प्लेक्स लेयर है, इसे अक्सर दो भागों में विभाजित किया जाता है, “Media Access Control” सबलेयर और “Logical Link Control” सबलेयर।

 

Key Points of Link Layer:

  • Data link layer उस इनफॉर्मेशन को सिंक्रनाइज़ करता है जो फिजिकल लेयर पर ट्रांसमिट होती है।
  • इस लेयर का मुख्य कार्य यह सुनिश्चित करना है कि फिजिकल लेयर पर एक नोड से दूसरे में डेटा ट्रांसफर एरर फ्री हो।
  • अनुक्रमिक रूप से प्राप्त ट्रांसमिशन और डेटा फ्रेम्स इस लेयर द्वारा मैनेज किया जाता है।

 

3) Network Layer in Hindi:

Network layer डेटा लिंक लेयर के ऊपर राउटिंग की कांसेप्‍ट को एड करता है। जब डेटा नेटवर्क लेयर पर आता है, तो प्रत्येक फ़्रेम के अंदर स्थित सोर्स और डेस्टिनेशन एड्रेस कि जाँच करता हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सकते कि डेटा उसके फाइनल डेस्टिनेशन तक पहुंच गया है या नहीं।

अगर डेटा फाइनल डेस्टिनेशन तक पहुंच गया है, तो यह लेयर 3 ट्रांसपोर्ट लेयर तक पहुंचने वाले पैकेटों में डेटा को फॉर्मेट करता है। अन्यथा, नेटवर्क लेयर डेस्टिनेशन एड्रेस को अपडेट करता है और फ्रेम को नीचे की लेयर में वापस पूश कर देता है।

राउटिंग को सपोर्ट करने के लिए, नेटवर्क लेयर नेटवर्क पर डिवाइसेस के लिए IP Address जैसे लॉजिकल एड्रेस मेंटेन करता है। नेटवर्क लेयर इन लॉजिकल एड्रेस और फिजिकल एड्रेस के बीच मैपिंग भी मैनेज करता है। आईपी ​​नेटवर्किंग में, यह मैपिंग एड्रेस रिज़ॉल्यूशन प्रोटोकॉल (ARP) के माध्यम से पूरा किया जाता है।

 

Key Points of Network Layer:

  • यह एक नोड से अन्य नोड तक विभिन्न चैनलों के माध्यम से सिग्नल को राउट करता है।
  • यह एक नेटवर्क कंट्रोलर के रूप में कार्य करता है। यह सबनेट ट्रैफिक मैनेज करता है।
  • यह तय करता है कि डेटा को किस रूट को लेना चाहिए।
  • यह आउटगोइंग मैसेजेस को पैकेट में बांटता है और इनकमिंग पैकेट को हाइर लेवर के लिए मैसेजेस को अस्सेम्बल करता है।

 

4) Transport Layer in Hindi:

ट्रांसपोर्ट लेयर डेटा को नेटवर्क कनेक्शन में भेजता है। TCP, ट्रांसपोर्ट लेयर 4 नेटवर्क प्रोटोकॉल का सबसे आम उदाहरण है। अलग-अलग ट्रांसपोर्ट प्रोटोकॉल वैकल्पिक क्षमताओं की एक रेंज को सपोर्ट कर सकते हैं जिसमें एरर रिकवरी, फ्लो कंट्रोल और रि-ट्रांसमिशन के लिए सपोर्ट शामिल हैं।

 

Key Points of Transport Layer:

  • एंड सिस्‍टम के बीच डेटा के ट्रांसपरेंट ट्रांसफर के लिए जिम्मेदार।
  • एंड-टू-एंड एरर रिवकरी और फ्लो कंट्रोल के लिए जिम्मेदार।
  • संपूर्ण डेटा ट्रांसफर के लिए जिम्मेदार।
  • यहां SPX, TCP, UDP जैसे प्रोटोकॉल काम करते हैं।

 

5) Session Layer in Hindi:

जब दो डिवाइसेस, कंप्यूटर या सर्वर को एक-दूसरे के साथ कम्युनिकेट की आवश्यकता होती है, तो session बनाना आवश्यकता होता है, और यह Session Layer पर किया जाता है। इस लेयर के फंक्‍शन में सेटअप, कोआर्डिनेशन (उदाहरण के लिए रिस्‍पॉंस के लिए सिस्टम को कितनी कितनी देर तक प्रतीक्षा करनी होगी) और सेशन के प्रत्येक एंड पर ऐप्‍लीकेशन के बीच टर्मिनेशन शामिल हैं।

 

Key Points of Session Layer:

  • ऐप्‍लीकेशन के बीच एस्टैब्लिशमेंन्ट, मैनेजमेंट और कनेक्शन के टर्मिनेशन के लिए जिम्मेदार।
  • Session layer प्रत्येक एंड पर एप्लिकेशन के बीच कोऑर्डिनेशन, एक्सचेंज और डाइलॉग सेटअप करता है।
  • यह सेशन और कनेक्शन कोऑर्डिनेशन के साथ काम करता है।
  • इस लेयर पर NFS, NetBios names, RPC, SQL जैसे प्रोटोकॉल काम करते हैं।

 

6) Presentation Layer in Hindi:

Presentation layer को Translation layer भी कहा जाता है। एप्लिकेशन लेयर से डेटा यहां एक्‍सट्रैक्‍ट किया जाता है और नेटवर्क पर ट्रांसमिट करने के लिए आवश्यक फॉर्मेट के अनुसार मैनिप्‍युलेट किया जाता है।

Presentation layer के फंक्‍शन इस प्रकार हैं:

Translation : उदाहरण के लिए, ASCII से EBCDIC

Encryption/ Decryption : डेटा एन्क्रिप्शन डेटा को किसी अन्य रूप या कोड में ट्रांसलेट करता है। एन्क्रिप्टेड डेटा को सिफर टेक्स्ट के रूप में जाना जाता है और डिक्रिप्टेड डेटा को प्‍लेन टेक्‍स्‍ट के रूप में जाना जाता है। डेटा को एन्क्रिप्ट करने और डिक्रिप्टिंग करने के लिए एक key वैल्‍यू का उपयोग किया जाता है।

Compression: नेटवर्क पर ट्रांसमिट किए जाने वाले बिट की संख्या को कम कर देता है।

 

Key Points of Presentation Layer:

  • Presentation layer यह ध्यान रखता है कि डेटा इस तरह से भेजा जाएं, ताकि रिसिवर इनफॉर्मेशन (डेटा) को समझ सके और डेटा का उपयोग करने में सक्षम हो।
  • डेटा प्राप्त करते समय, presentation layer ऐपलीकेशन लेयर के लिए डेटा ट्रांसफॉर्म कर रेडी करता हैं।
  • दो कम्युनिकेशन सिस्‍टम में लैग्‍वेज (सिंटैक्स) भिन्न हो सकती हैं। इस स्थिति के अंतर्गत presentation layer ट्रांसलेटर की भूमिका निभाता है।
  • यह डाटा कंप्रेशन, डाटा एन्क्रिप्शन, डेटा कन्वर्शन इत्यादि परफॉर्म करता है।

 

7) Application Layer in Hindi:

OSI Reference Model के टॉप पर Application layer होता हैं, जो नेटवर्क ऐप्‍लीकेशन द्वारा इम्प्लीमेंट किया जाता है। यह ऐप्‍लीकेशन डेटा को प्रोडयुस करते हैं, जिसे नेटवर्क पर ट्रांसफर किया जाता हैं।

यह लेयर नेटवर्क एक्‍सेस के लिए ऐप्‍लीकेशन सर्विसेस के लिए विंडो के रूप में कार्य करता हैं और यूजर्स को प्राप्‍त इनफॉर्मेशन को दिखाता हैं।

वेब ब्राउज़र (गूगल क्रोम, फायरफॉक्स, सफारी, आदि) या अन्य ऐप – स्काइप, आउटलुक, ऑफिस यह सभी लेयर 7 एप्लीकेशन के उदाहरण हैं।

 

Key Points of Application Layer:

  • एप्लिकेशन लेयर ऐप्‍लीकेशन, ऐप्स और एंड यूजर्स प्रोसेसेस को सपोर्ट करता है।
  • सर्विस कि क्‍वालिटी।
  • यह लेयर फ़ाइल ट्रांसफर, ई-मेल और अन्य नेटवर्क सॉफ़्टवेयर सर्विसेस के लिए एप्लिकेशन सर्विसेस के लिए ज़िम्मेदार है।
  • इस लेयर पर Telnet, FTP, HTTP जैसे प्रोटोकॉल काम करते हैं।

 

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OSI Model in Hindi
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