क्‍या आप जानते हैं कि आपको कितने तरीकों से ट्रैक किया जा सकता हैं?

Location Tracking Techniques Hindi.

 

 

Location Tracking Techniques Hindi

चूंकि बच्चें हाइड एंड सीक गेम खेलते हैं, तो कई सारे जगह होते हैं जहां वे छिप जाएं तो उन्‍हे ढूँढ़ना मुश्किल हो जाता हैं। लेकिन आज कि टेक्नोलॉजी के माध्यम से दुनिया इतनी छोटी हो गई हैं कि किसी से छिपना कठिन है।

इस लोकेशन-ट्रैकिंग टेक्नोलॉजी का उपयोग कई जगह पर किया जा रहा है, जैसे कि संपत्ति की निगरानी करना और इन्वेंट्री नुकसान को रोकने के लिए आदि।

लेकिन फैक्‍ट यह है कि आपकी कंपनी इंटरनेट पर आपके लोकेशन के बारें जान सकती है। यह एक वास्तविक तथ्य है कि वे आपको तब भी ट्रैक कर सकते हैं जब आप इंटरनेट से कनेक्‍ट नहीं हैं या आपने किसी जावा स्क्रिप्ट कोड को ब्लॉक कर दिया हैं जो इसे बाईपास कर सकता हैं।

इस तथ्य के बावजूद कि आप वेब पर कॉन्‍टैक्‍ट में आने वाले सर्विसेस से कभी भी अपने आप को छिपा नहीं सकते (TOR या VPN के उपयोग को छोड़कर)। इसलिए अभी यह जानना आपके लिए अत्यंत आवश्यक हैं कि वे कौनसी मेथड हैं, जिनसे आपको ट्रैक किया जा सकता हैं।

इस प्रकार का नॉलेज, अंत में, आपको आपकी प्राइवेसी के बारे में बेहतर निर्णय लेने के लिए सक्षम करेगा।

आपके मोबाइल फोन के माध्यम से किसी के लोकेशन को ट्रैक करने कि कुछ सबसे लोकप्रिय टेक्नोलॉजी के बारे में सब कुछ जानने के लिए एक नज़र डालें।

 

1) GPS Tracking:

जीपीएस ट्रैकिंग सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक है। GPS टेक्नोलॉजी २४ सैटेलाइटस् पर काम करती हैं जो पृथ्वी के चारों और घूमते हैं और रिसीवर के लिए रेडियो सिग्नल भेजते है, जिनका उपयोग लोकेशन कोऑर्डिनेट को रिकॉर्ड और ट्रांसमिट करने के लिए किया जाता हैं।

सटीक जानकारी इकट्ठा करने के लिए रिसीवर को कम से कम तीन सैटेलाइटस् से कनेक्‍ट होना चाहिए। GPS न केवल डिवाइस के सटीक लोकेशन को बताता है, बल्कि नेविगेशन कि हिस्‍ट्री भी बताता है।

एक बात इस टेक्नोलॉजी को अन्य ट्रैकिंग टेक्नोलॉजी से अलग करती हैं और वह यह हैं कि यह मैक्सिमम एक्यूरेसी देता हैं, जिसकी रेंज केवल कुछ मीटर ही हैं।

ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम ट्रैकिंग यह पता लगाती हैं कि कुछ वास्तव में कहां पर हैं। उदाहरण के लिए, एक जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम, एक वाहन में, सेलफोन में या विशेष जीपीएस डिवाइस पर रखा जा सकता है, जो कि एक निश्चित या पोर्टेबल युनिट हो सकता है। GPS इनका अचूक लोकेशन बताता हैं।

हालांकि, इसमें कुछ लिमिटेशंस भी हैं। सबसे पहले, यह केवल जीपीएस-एनेबल डिवाइस पर ही लोकेशन का पता लगा सकता है। दूसरा, यह खराब मौसम से प्रभावित होता है तीसरा, यह बेसमेंट और सुरंगों में काम नहीं कर सकता।

 

2) Wi-Fi Tracking:

सटीकता: 20 से 30 मीटर

Wi -Fi Positioning System (WPS) एक टर्म है जिसका उपयोग वाई-फाई-आधारित लोकेशन सिस्‍टम को डिस्क्राइब करने के लिए किया है। हालांकि, Google, ऐप्पल और माइक्रोसॉफ्ट जैसे अन्य कंपनियां वाई-फाई नेटवर्क को निर्धारित करने के लिए GPS का उपयोग करती हैं, जो कि केवल वाई-फाई पर आधारित किसी का लोकेशन ढूंढने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता हैं।

वाई-फाई ट्रैकिंग, डिवाइस के लोकेशन को ट्रैक करने के लिए वाई-फाई हॉटस्पॉट या एक्सेस प्वाइंट का उपयोग करती है। अकेले अमेरिका में, 72,000 से अधिक वाई-फाई एक्‍सेस पॉइंट हैं, जो सालाना 40% की दर से बढ़ रहे है।

GPS ट्रैकिंग के मुकाबले वाई-फाई ट्रैकिंग कम एक्यूरेट है। इसकी एक्यूरेसी 20 से 30 मीटर तक भिन्न हो सकती है।

लेकिन इस ट्रैकिंग टेक्नोलॉजी के बारे में सकारात्मक बात यह है कि यह घर के भीतर अच्छी तरह से काम करता है। इसके अलावा, मौसम संबंधी स्थितियों से वाई-फाई सिग्नल प्रभावित नहीं होते।

लेकिन GPS की तरह, वाई-फाई ट्रैकिंग में भी कुछ कमियां हैं। सबसे पहले, इसे ठीक से काम करने के लिए वाई-फाई सिग्नल की आवश्यकता होती है। दूसरे, यह तब तक काम नहीं करता जब तक वाई-फाई हॉटस्पॉट डेटाबेस को नियमित अंतराल के बाद अपडेट नहीं किया जाता।

 

3) GSM Tracking:

एक्यूरेसी: 50 मीटर से कुछ मील तक

अगर आपके फोन में एक सिम कार्ड है, तो यह हमेशा 45 मील (~ 70 किमी) के भीतर एक सेल टॉवर से जुड़ा होता है। एक बार जब ऐप को उस टॉवर (इसकी सेल आईडी) की पहचान संख्या मिल जाती है, तो यह बता सकता हैं आप दुनिया में कहां पर हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपका मोबाइल इंटरनेट से कनेक्‍ट हैं या नहीं।

GSM या सेल टॉवर आधारित ट्रैकिंग, स्मार्टफोन्स के लोकेशन पर नज़र रखने का प्रभावी तरीका है। GPS या वाई-फाई ट्रैकर के विपरीत, GSM को लोकेशन ट्रैक करने के लिए किसी कि भी आवश्यकता नहीं है।

इसमें किसी सेल टॉवर से कनेक्‍ट हर डिवाइस को आसानी से ट्रैक किया जा सकता है। इसके अलावा, यह ऊपर के दो ट्रैकिंग लोकेशन तरीके से अधिक तेज़ है।

GSM ट्रैकिंग में कुछ कमियां हैं सबसे पहली, इसकी ट्रैक करने कि एक्यूरेसी डिवाइस के आसपास मौजूद सेल टॉवर की संख्या पर निर्भर करता है दूसरी, इसकी एक्यूरेसी कुछ मील से 50 मीटर तक भिन्न होती है।

 

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