इंटरनेट पर कई शब्द आपके सामने आते हैं। क्या आपको पता हैं उनका अर्थ?

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Internet Technical Terms Definitions Hindi

 

आज की तकनीक की दुनिया के लिए ऑक्सीजन के समान है ये इंटरनेट! जाने ..

Internet Terms in Hindi

Internet Technical Terms Definitions Hindi

1) इंटरनेट:

इंटरनेट दुनिया का सबसे बड़ा नेटवर्क है, जिसमें लाखों वैश्विक स्‍तर सें निजी, सरकारी, सार्वजनिक, शैक्षणिक आदि के नेटवर्क शामिल हैं और वे केबल, ऑप्टिकल फाइबर, उपग्रहों या वायरलेस टेक्‍नोलॉजी से जुड़े होते है और इसलिए इंटरनेट को सभी अन्‍य नेटवर्क का नेटवर्क कहा जाता है|

इंटरनेट वर्ल्ड वाइड वेब (WWW), ई-मेल, गेम्‍स, डॉक्युमेंट्स, ऑडियो और वीडीओ जैसे आदि कई इन्‍फार्मेशन रिसोर्सेज के बहुत बड़ी मात्रा में कॅरी करता है|

इंटरनेट को अब Comcast, AT&T, और भारत में BSNL, MTNL जैसे आदि बड़े इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर है|

 

2) WWW (वर्ल्ड वाइड वेब):

बहुत से युजर को लगता है कि इंटरनेट और वर्ल्ड वाइड वेब एक ही है। लेकिन वे नहीं हैं! अभी आप ब्राउज़र में जो भी ब्राउज़ कर रहे हैं वह वर्ल्ड वाइड वेब है। वर्ल्ड वाइड वेब (WWW) यह एक इन्‍फार्मेशन स्‍पेस हैं जहाँ डॉक्युमेंट्स और अन्‍य वेब रिसोर्सेज URL, हाइपरटेक्स्ट लिंक द्वारा पहचाने जाते हैं और वे इंटरनेट के माध्‍यम सें एक्‍सेस होते हैं|

 

3) http:

हाइपर टेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल (HTTP) एक मेथड या रूल है जो वेब पेजेस को आपके कंप्‍यूटर पर ट्रांसफर करने के लिए इस्‍मेमाल किया जाता है| HTTP डिफाइन करता है कि मैसेजेस को कैसे फॉर्मेट और ट्रांसमिट करना हैं और वेब सर्वर और ब्राउज़र्स को विभिन्‍न कमांड के जवाब में क्‍या एक्शन लेना चाहिए|

उदाहरण के लिए, जब आप ब्राउज़र में एक URL टाइप करते हैं तो वास्‍तव में आप HTTP कमांड को वेब सर्वर पर अनुरोध किया गया वेब पेज लाने और उसे ट्रांसमिट करने का आदेश भेजते है|

 

3) https:

‘Hypertext Transfer Protocol SECURED’ यह एक सुरक्षित हाइपरटेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल है। यह HTTP का सुरक्षित संस्करण है और इसमें ब्राउज़र और वेबसाइट के बीच के सभी संचार एन्क्रिप्टेड होते हैं। बैंकों और अन्य वित्तीय संबंधित वेबसाइटों के दवारा आपकी जानकारी को सुरक्षित रखने के लिए इस प्रोटोकॉल का उपयोग करते हैं।

 

4) FTP:

FTP फाइल ट्रांसफर प्रोटोकॉल है। इसे कंप्‍यूटर फाइलों को एक होस्‍ट से दुसरे होस्‍ट तक TCP पर आधारित नेटवर्क जैसे कि इंटरनेट पर डाटा ट्रांसफर करने के लिए इस्‍तेमाल किया जाता है|

 

5) Browser:

ब्राउज़र का उपयोग इंटरनेट एक्‍सेस करने के लिए होता है| ब्राउज़र किसी भी वेब साइट के कंटेंट को डिस्‍प्‍ले करते है जिसमें वेब पेजेस, इमेजेस, वीडीओ और अन्‍य फाइल्‍स होते होते है और आप इसमें कई एक्टिविटी कर सकते है| सबसे लोकप्रिय वेब ब्राउज़र Google Chrome, Firefox, Internet Explorer, Opera और Safari हैं।

 

6) URL:

यूआरएल याने “Uniform Resource Locator” यूआरएल इंटरनेट पर किसी विशेष वेब साइट या फ़ाइल का एड्रेस होता है।

यूआरएल मे निम्‍न भाग होते हैं –

 

यहां

http- हाइपर टेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल

www- वर्ल्ड वाइड वेब

itkhoj – डोमेन नेम – यह एक युनिक वेबसाइट का नाम होता है| डोमेन नेम एक इंटरनेट प्रोटोकॉल (आईपी) रिसोर्सेस को इंटरनेट के माध्‍यम से रिप्रेजेंटे करता है।

com –डोमेन कोड

हर डोमेन कोड यह वेब साइट किस तरह कि है यह दर्शाता है जैसे –

com – कमर्शियल

gov –  गवर्नमेंट

edu – एजुकेशनल

org –  आर्गेनाइजेशन

mil –  मिलिट्री

net –नेटवर्क

in –  इंडिया

 

7) HTML:

एचटीएमएल हा मतलब ” Hyper Text Markup Language ” यह वेब पेज बनाने के लिए उपयोग किए जाने वाले प्रोग्राम संबंधी लैंग्‍वेज है।

एचटीएमएल में Dreamwewer और Frontpage जैसे एचटीएमएल एडिटर के लिए शॉर्ट कोड होते है| इन फाइल्‍स को बाद में HTML फ़ाइल के रूप सेव किया जाता है और इन्‍हे ब्राउज़र के माध्यम से देखा जाता है| HTML में HTML tags होते है जो ऐसे दिखते है –

<!DOCTYPE html>

<html>

<head>

<title>Page Title</title>

</head>

<body>

<h1>My Heading</h1>

<p>My  paragraph.</p>

</body>

</html>

 

8) XML:

Extensible Markup Language. (XML) एक्सएमएल HTML की तरह एक मार्कअप लैंग्‍वेज है और इसे डाटा को डिस्क्राइब करने के लिए डिजाइन किया गया है।

 

9) Bandwidth:

बैंडविड्थ डिस्क्राइब करता है कि, निश्चित समय में विशिष्ट कनेक्शन पर कितना डाटा ट्रांसमिट हो रहा है| यह किसी नेटवर्क या इंटरनेट कनेक्‍शन की अधिकतम डाटा ट्रांसफर रेट हैं| संक्षेप में ज्यादा बैंडविड्थ याने अधिक तेजी से डाटा ट्रांसफर रेट और जादा गति|

 

10) CAPTCHA:

कॅप्चा एक प्रोग्राम होता है जो वेब साइट की बोटस से रक्षा करने के लिए, ऐसे टेस्‍ट को बनाते और ग्रेडिंग करते हैं, जिन्‍हे केवल मुनुष्‍य ही पारित कर सकते है लेकिन मौजूदा कंप्‍यूटर प्रोग्राम नहीं कर सकते| इंटरनेट पर कुछ स्‍पाम प्रोग्राम होते है, जो ऑटोमेटिक ब्‍लॉग में कंटेंट को सबमिट करता हैं, आम तौर पर इसका उद्देश वेबसाइट की संर्च इंजन में रैंक बढ़ना होता हैं| CAPTCHA एक वर्ड वेरीफिकेशन टेस्‍ट होती है, इसे वेवल मुनुष्‍य ही पढ़ और इसकी पुष्टि कर सकते हैं| लेकिन कोई भी कंप्‍यूटर जनरेटेड प्रोग्राम्‍स इन्‍हे नहीं पढ़ सकते हैं और वेरिफाइ कर सकते हैं|

 

11) Bookmark:

बुकमार्क किसी वेब पेज की सेव की गयी लिंग होती है, जिसे saved links में एड किया जाता हैं| कई बार आपको किसी वेब पेज पर कई बार वापस आना पड़ता है या फिर आप ब्राउजिंग कर रहे हो और आपको किसी वेब पर महत्‍वपूर्ण जानकारी मिली जिसे आप बादमें देखना चाहते है तो ऐसे वक्‍त इस वेब पेज को बुकमार्क कर सकते हैं| जिससे आप अगली बार इस वेब पर जल्‍दी से जा सकते हैं|

 

12) Addons/Plugins/Extension:

ऐड-ऑन को एक्‍टीव एक्‍स कंट्रोल, ब्राउजर एक्‍सटेंशन, ब्राउजर हेल्‍पर ऑब्‍जेक्‍ट या टूलबार के रूप में जाना जाता है| वे बेब साइट में अतिरिक्‍त फीचर्स को एड करके ब्राउजिंग के एक्सपीरियंस को बढ़ाते हैं| ब्राउजर एक्‍सटेंशन आपको तेजी से काम करने और समय की बचत करने के लिए मदद करते हैं| संक्षेप में ब्राउजर एक्‍सटेंशन आपको स्‍मार्ट युजर बनाते हैं|

 

13) Encryption:

एन्क्रिप्शन यह मैसेज या फाइल को एन्कोडिंग की प्रोसेस है, जो इसके कंटेंट को स्क्रैम्बल करता हैं,  जिससे की केवल ऑथराइज़्ड पर्सन इसे पढ़ सकते हैं| एन्क्रिप्शन डेटा सुरक्षा के लिए सबसे प्रभावी तरीका है। उदाहरण के लिए अगर आप वेबसाइट से कुछ भी खरीद रहे हैं, तो इस ट्रांजेक्‍शन (जैसे आपका पता, फोन नंबर, और क्रेडिट कार्ड नंबर) की जानकारी को आमतौर पर सुरक्षित रखने में मदद करने के लिए इसे एन्क्रिप्टेड किया जाता है।

 

14) Spamming:

स्पैमिंग याने अनापेक्षित या अकारण मेल्‍स को भेजना हैं| इसका मतलब है कि इस मेल में भेजने वाले का नाम छिपा हुआ होता हैं, इसे बल्‍क में हजारो या लाखों युजर को भेजा जाता हैं, और वे अनावश्यक होते हैं| अधिकांश समय स्‍पाम मेल को कमर्शियल एडवरटाइजमेंट, किसी प्राटक्‍ट या सर्विस को प्रमोट करने या दुसरों के पैसे हडपने के लिए स्‍कैम भी होते हैं|

 

15) Phishing:

फिशिंग यह टेक्निक  हैं, जिसमें आपकी व्यक्तिगत जानकारी हासिल करके फ्राड का प्रयास किया जाता हैं| फिशिंग आमतौर पर ऐसे मेल्‍स के माध्‍यम से होता है, जिसमे वे बैंकों, eBay, Apple जैसी अच्छी तरह से जाने जाने वाली और भरोसेमंद वेब साइटों से आते दिखाई देते हैं| क्‍योकि यह इमेल पूरी तरह ऑफिसियल दिखाई देते हैं, कई निर्दोष युजर इन्‍हे रिप्‍लाई करके अपनी निजी जानकारी दे देते हैं और फिर उन्‍हे फाइनेंस को घटा होता हैं या फिर उनकी पहचान की चोरी होती है, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें धोखाधड़ी की गतिविधि का सामना करना पड़ सकता हैं|

 

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