इंटरनेट की खोज किसने की? इंटरनेट का आविष्कार कब, क्यों किया?

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इंटरनेट की खोज किसने की

हालांकि वर्ल्ड वाइड वेब को शुरू में एक व्यक्ति ने आविष्कार किया था, लेकिन इंटरनेट की उत्पत्ति में कई व्यक्तियों और ग्रुप का प्रयास था। इसका जन्म हमें शीत युद्ध के दौरान अमेरिका और यूएसएसआर के बीच टेक्नोलॉजी के अत्यंत प्रतिस्पर्धी यूग में वापस ले जाता है।

सोवियत संघ ने 4 अक्टूबर, 1957 को Sputnik 1 उपग्रह को अंतरिक्ष में भेजा। आंशिक रूप से इसकी प्रतिक्रिया में, अमेरिकी सरकार ने 1958 में Advanced Research Project Agency को बनाया, जिसे आज DARPA -डिफेंस Defense Advanced Research Projects Agency के रूप में जाना जाता है। इस एजेंसी का विशिष्ट मिशन था Sputnik 1 उपग्रह के प्रक्षेपण के टेक्नोलॉजी को रोकना।

J C R Licklider-Who invented the internet
J C R Licklider

ऐसे प्रयासों के समन्वय के लिए, विभिन्न विश्वविद्यालयों और प्रयोगशालाओं के बीच डेटा का आदान-प्रदान करने के लिए एक फास्‍ट तरीके कि जरूरत थी। इसके लिए J. C. R. Licklider ने इंटरनेट के सैद्धांतिक आधार के लिए “Intergalactic Computer Network” बनाया। उनका विचार एक ऐसा नेटवर्क बनाना था, जहां कई अलग-अलग कंप्यूटर सिस्टम एक दूसरे के साथ आपस में इस तरह से कनेक्‍ट होंगे, जो डेटा का शीघ्र गती से आदान-प्रदान कर सकेंगे।

लॉरेंस जी रॉबर्ट्स के 1966 पब्लिकेशन “Towards a Cooperative Network of Time-Shared Computers” से ARPANET (Advanced Research Projects Agency Network) कि आइडिया का जन्‍म हुआ।

जनवरी 1969 में, Advanced Research Projects Agency of the Department of Defense (ARPA) ने एक कम्युनिकेशन नेटवर्क के डिजाइन और निर्माण के लिए बोल्ट, बेरनेक और न्यूमैन (बीबीएन) को कॉन्ट्रैक्ट दिया।

सन 1969 के अंत में ARPANET नें कैलिफोर्निया लॉस एंजिल्स (UCLA), कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के सांता बारबरा (UCSB), उटाह यूनिवर्सिटी और स्टैनफोर्ड रिसर्च इंस्टीट्यूट (SRI) के चार नोड को कनेक्‍ट किया गया।

ARPANET-Who invented the internet

इस नेटवर्क का पहला उपयोग 29, 1969 को 10:30 बजे हुआ और यह UCLA और स्टैनफोर्ड रिसर्च इंस्टीट्यूट के बीच एक कम्युनिकेशन था।

परमाणु युद्ध के खतरे के साथ, एक ऐसी सिस्‍टम को विकेंद्रीकृत करने के लिए आवश्यक थी, जिसमें एक नोड नष्ट हो गया हो, तो फिर भी अन्य सभी कंप्यूटरों के बीच कम्युनिकेशन हो सके। अमेरिकी इंजीनियर पॉल बारन ने इस मुद्दे का समाधान प्रदान किया; उन्होंने एक विकेन्द्रीकृत नेटवर्क तैयार किया जो डाटा भेजने और प्राप्त करने के लिए पैकेट स्विचिंग का इस्तेमाल करता था।

कई अन्य लोगों ने एक कुशल पैकेट स्विचिंग सिस्टम के विकास में योगदान दिया, जिसमें लियोनार्ड क्लेनरॉक और डोनाल्ड डेविस शामिल थे। यदि आप “पैकेट स्विचिंग” से परिचित नहीं हैं, तो यह मूल रूप से सभी ट्रांसमिटेड डेटा को उपयुक्त-आकार वाले ब्‍लॉक में ब्रेक करता है, जिन्‍हे पैकेट कहा जाता है। इन पैकेटस् को अलग अलग मार्ग से डेस्टिनेशन तक भेजा जाता है।

Packet Switching-Who invented the internet

उदाहरण के लिए, यदि आप किसी अन्य सिस्टम से बड़ी फ़ाइल एक्सेस करना चाहते हैं, तो जब आप इस फाइल को डाउनलोड करने का प्रयास करते हैं, तब एक ही स्‍ट्रीम में पूरी फाइल भेजने के लिए लगातार कनेक्शन की आवश्यकता होती है। इसके बजाय, यह डेटा के छोटे पैकेटों में विभाजित होता है, और प्रत्येक पैकेट व्यक्तिगत रूप से अलग अलग पाथ से भेजा जाता है। जो सिस्‍टम इस फाइल को डाउनलोड करती है, वह इन पैकेटस् को एकत्रित कर दोबारा मूल पूर्ण फ़ाइल बनाता है।

1972 तक, ARPANET से कनेक्‍ट कंप्यूटरों की संख्या 23 हो गई थी और यह वह समय था, जब इलेक्ट्रॉनिक मेल (ईमेल) शब्द का इस्तेमाल पहली बार किया गया था। कंप्यूटर वैज्ञानिक रे टेमलिन्सन ने ARPANET में ई-मेल सिस्टम का इस्तेमाल किया था, जिसमें ईमेल भेजने वाले का नाम और नेटवर्क के नाम को अलग करने के लिए “@” सिंबॉल का इस्‍तेमाल किया गया।

इन डेवलपमेंट के साथ, इंजीनियरों ने अधिक नेटवर्क बनाए, जो कि X.25  और UUCP जैसे विभिन्न प्रोटोकॉल का इस्तेमाल करते थे। ARPANET द्वारा कम्युनिकेशन के लिए मूल प्रोटोकॉल NCP (Network Control Protocol) इस्तेमाल किया गया था।

अब एक ऐसे प्रोटोकॉल की ज़रूरत थी, जो सभी नेटवर्कों को एकजुट कर सके।

1974 में कई असफल प्रयासों के बाद, विंट सर्फ और बॉब काहन द्वारा एक पेपर प्रकाशित किया, जिसे “The Fathers Of The Internet” के रूप में भी जाना जाता है। इसका नतीजा TCP (Transmission Control Protocol) मे हुआ, जो 1978 में TCP/IP (आईपी का मतलब इंटरनेट प्रोटोकॉल) बन गया।

हाई लेवल पर TCP/IP एक सिस्‍टम है, जो यह सुनिश्चित करती है कि डेटा के पैकेटस् को भेजा और प्राप्‍त किया जा रहा है। और फिर पैकेटस् को उचित क्रम में असेंबल्ड किया जाता है, जिससे डाउनलोड किए डेटा को ओरिजनल डेटा के साथ मिलाया जाता है। इसलिए, यदि कोई पैकेट ट्रांसमिशन में खो जाता है, तो टीसीपी एक ऐसी सिस्‍टम है जो यह पता लगाती है और सुनिश्चित करती है कि गायब पैकेट पुनः प्राप्त हो और सफलतापूर्वक प्राप्त हो।

1 जनवरी, 1983 को, TCP/IP प्रोटोकॉल ARPANET के लिए विशेष कम्युनिकेशन प्रोटोकॉल बन गया।

इसके साथ ही 1983 में, पॉल मोकपेट्रिस ने इंटरनेट नाम और एड्रेस पेयर पेअर के वितरित डाटाबेस का प्रस्ताव प्रस्ताव रखा, जिसे अब Domain Name System (DNS) कहा जाता है। यह वास्तव में एक डिस्ट्रिब्यूटेड “फोन बुक” है जिसमें डोमेन नेम को आईपी एड्रेस के साथ लिंक किया जाता है। इससे आप किसी भी वेब साइट के आईपी एड्रेस को टाइप करने के बजाय उसका नाम टाइप कर सकते है।

जैसे गूगल के लिए ब्राउजर में 172.217.24.132 यह आईपी टाइप करने के बजाय आप www.google.com टाइप कर सकते है।

इस सिस्‍टम के डिस्ट्रिब्यूटेड वर्जन ने इसके डिसेंट्रलाईज़ अप्रोच के लिए अनुमति दी। इससे पहले, एक सेंट्रल hosts.txt फाइल को स्टैनफोर्ड रिसर्च इंस्टिट्यूट मे मेंटेन किया जाता था। इसे बाद में डाउनलोड कर अन्‍य सिस्‍टम द्वारा उपयोग किया जाता था। बेशक, 1983 तक भी, इसे मेंटेंन करना एक समस्‍या थी और डिसेंट्रलाईज़ अप्रोच कि जरूरत बढ़ रही थी।

इसकी वजह से सन 1989 में CERN (European Organization for Nuclear Research) के टिम बर्नर्स-ली ने इंटरनेट पर इनफॉर्मेशन डिस्ट्रिब्यूट करने के लिए एक सिस्‍टम डेवलप की और इसे World Wide Web नाम दिया।

इंटरनेट के साथ हाइपरटेक्स्ट सिस्टम (लिंक किए गए पेजेस) से आज कि मौजूदा सिस्‍टम बनी है।

यह वेब सर्वर और वेब ब्राउज़रों के सरल इम्प्लिमेन्टेशन को प्रदान करता है और यह एक पूरी तरह से ओपन प्लेटफार्म है, जिसमें कोई भी रॉयल्टी का भुगतान किए बिना स्वयं के सिस्टम को डेवलप कर सकता है।

यह सब करने की प्रोसेस में, बर्नर्स-ली ने URL फॉर्मेट, Hypertext Markup Language (HTML), और Hypertext Transfer Protocol (HTTP) को डेवलप किया।

इसी समय, वेब के सबसे लोकप्रिय विकल्पों में से एक, गोफर सिस्टम ने घोषणा की कि वह अब उपयोग करने के लिए फ्री नहीं होगा, और इसे वर्ल्ड वाइड वेब पर कई स्विच के साथ प्रभावी ढंग से मार डाला जाएगा।

आज, वेब इतनी लोकप्रिय है कि कई लोग अक्सर इसे इंटरनेट के रूप में सोचते हैं, हालांकि यह ऐसा मामला बिल्कुल भी नहीं है।

इसके अलावा वर्ल्ड वाइड वेब के निर्माण के दौरान, इंटरनेट के व्यावसायिक उपयोग पर लगे प्रतिबंध धीरे-धीरे हटा दिए गए, जो इस नेटवर्क की अंतिम सफलता में एक अन्य महत्वपूर्ण तत्व था।

इसके बाद, 1993 में, मार्क एंड्रेसन के नेतृत्व में मोजाइक नामक वर्ल्ड वाइड वेब के लिए एक ब्राउज़र डेवलप किया गया। यह अमेरिकी सरकार की पहल और फंडिंग से डेवलप एक ग्राफिकल ब्राउज़र था।

 

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