Internet History Hindi में! जानिएं कैसे डेवलप हुआ आज का इंटरनेट

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Internet History Hindi.

Internet History in Hindi

History of Internet in Hindi:

इंटरनेट की हिस्‍ट्री हिंदी में:

इंटरनेट ने कंप्यूटर और कम्युनिकेशन कि दुनिया में एक नई क्रांती ला दी हैं। टेलीग्राफ, टेलीफोन, रेडियो और कंप्यूटर के आविष्कारों ने इस अभूतपूर्व काबिलियत के लिए एक मंच तैयार किया।

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ARPANET का जन्म:

साइंटिस्ट्स और मिलिट्री एक्‍सपर्ट विशेष रूप से चिंतित थे कि राष्ट्र के टेलीफोन सिस्टम पर सोवियत हमले की स्थिति में क्या हो सकता है। वे डरते थे कि सिर्फ एक मिसाइल, पूरे नेटवर्क लाइनों और तारों को नष्ट कर सकते थे।

1962 में, M.I.T. और ARPA के एक साइंटिस्ट्स जे.सी.आर. लिकलाइडर ने इस समस्या का समाधान प्रस्तावित किया: कंप्यूटर का एक “Galactic Network” जिसमें कंप्‍यूटर एक दूसरे से बात कर सकते थे। इस तरह के एक नेटवर्क से वे कम्युनिकेशन करने में सक्षम होंगे, भले ही सोवियत संघ उनकी टेलीफोन सिस्‍टम को नष्ट कर दे।

1965 में, एक M.I.T के अन्य साइंटिस्ट ने एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्‍यूटर पर इनफॉर्मेशन भेजने का एक तरीका डेवलप किया, जिसे उन्होंने “Packet Switching” कहा। Packet Switching को अपने डेस्टिनेशन पर भेजने से पहले डेटा को ब्लॉकों या पैकेट में ब्रेक करता है।

यह पैकेट अलग-अलग मार्ग से अपने डेस्टिनेशन पर पहुँचते थे। पैकेट स्विचिंग के बिना, सरकार का यह कंप्यूटर नेटवर्क- जिसे अब ARPAnet के नाम से जाना जाता था- वह फोन सिस्‍टम की तरह ही दुश्मन के हमलों का आसान शिकार था।

 

“LOGIN”

1969 में, ARPAnet ने अपना पहला मैसेज: एक “node-to-node” कम्युनिकेशन एक कंप्यूटर से दूसरे तक पहुंचाया (पहला कंप्यूटर UCLA के एक रिसर्च लैब में था और दूसरा स्टैनफोर्ड में था, और दोनों कि साइज एक घर कि साइज जितनी थी)। मैसेज LOGIN शॉर्ट और सरल था, लेकिन वह ARPA के नेटवर्क में क्रैश हो गया और स्टैनफोर्ड कंप्यूटर को केवल नोट के पहले दो अक्षर प्राप्त हुए।

1969 के अंत तक, केवल चार कंप्यूटर ARPAnet से कनेक्‍ट थे, लेकिन 1970 के दशक के दौरान नेटवर्क तेजी से बढ़ गया। 1971 में, उसने University of Hawaii के ALOHAnet को एड किया, और दो साल बाद नॉर्वे के London’s University College और Royal Radar Establishment को नेटवर्क में एड किया।

जैसे-जैसे पैकेट-स्विच किए गए कंप्यूटर नेटवर्क में बढ़ते गए, फिर उनके लिए इन्‍हे एक वर्डवाइड “इंटरनेट” में इंटिग्रेट करना और अधिक कठिन हो गया।

1970 के दशक के अंत में, विंटोन सर्फ नाम के एक कंप्यूटर साइंटिस्ट ने दुनिया के मिनी नेटवर्कों के सभी कंप्यूटरों के लिए एक दूसरे के साथ कम्युनिकेशन करने के लिए एक तरीका डेवलप कर इस समस्या का समाधान करना शुरू कर दिया था। उन्होंने अपने आविष्कार को “Transmission Control Protocol,” या TCP का नाम दिया। (बाद में, उन्होंने एक अतिरिक्त प्रोटोकॉल को एड किया, जिसे “Internet Protocol” कहा जाता है। आज हम जो संदर्भों का उपयोग करते हैं, वे TCP/IP हैं।)

 

World Wide Web

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सर्फ के प्रोटोकॉल ने इंटरनेट को एक विश्वव्यापी नेटवर्क में बदल दिया। 1980 के दशक के दौरान, रिसर्चर और साइंटिस्ट्स ने इसका इस्तेमाल एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्‍यूटर तक फाइल और डेटा भेजने के लिए किया था।

हालांकि, 1991 में इंटरनेट में फिर से एक क्रांती हुई। उस वर्ष, स्विट्जरलैंड के टिम बर्नर्स-ली नामक कंप्यूटर प्रोग्रामर ने World Wide Web की शुरुआत की: एक इंटरनेट जो केवल एक लोकेशन से दूसरे लोकेशन पर फाइल भेजने का एक तरीका नहीं था, लेकिन वह खुद ही इनफॉर्मेशन का “वेब” था। बर्नर्स-ली ने वह इंटरनेट बनाया जो आज हम जानते हैं।

तब से, इंटरनेट कई तरह से बदल गया है 1992 में, University of Illinois के स्टूडेंट्स और रिसचर्स के एक ग्रुप ने एक परिष्कृत ब्राउज़र डेवलप किया, जिसे उन्होंने Mosaic कहा। (यह बाद में Netscape बन गया।) Mosaic क ने वेब पर सर्च करने के लिए एक यूजर-फ्रैंडली तरीके की पेशकश की: इससे यूजर्स को पहली बार एक ही पेज पर टेक्‍स्‍ट और इमेजेस देखने और स्क्रॉलबार और क्लिक करने योग्य लिंक का उपयोग करने के लिए नेविगेट करने की अनुमति मिल गई। उसी वर्ष, गवर्नमेंट ने निर्णय लिया कि Web को कमर्शियल प्रयोजनों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। और इसके बाद ई-कॉर्मस इंटरनेट का इस्‍तेमाल अपनी सर्विस और माल सिधे कस्‍टमर्स को बेचने लगे।

 

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