Homeक्या आप जानते हैं?Computer Memory Hindi में! कंप्यूटर मेमोरी के बारे में जानने का सबसे...

Computer Memory Hindi में! कंप्यूटर मेमोरी के बारे में जानने का सबसे प्रभावी तरीका

Computer Memory in Hindi

What is Computer Memory in Hindi

कंप्‍यूटर में मेमोरी एक मनुष्‍य के दिमाग की तरह हैं। इसका इस्तेमाल डेटा और इंस्ट्रक्शंस को स्‍टोर करने के लिए किया जाता है। कंप्‍यूटर मेमोरी कंप्यूटर में स्‍टोरेज स्‍पेस लोकेशन है, जहां डेटा को प्रोसेस किया जाता है और प्रोसेसिंग के लिए आवश्‍यक इंस्ट्रक्शंस को स्‍टोर किया जाता है।

मेमोरी शब्द आपके कंप्यूटर के उस कंपोनेंट को संदर्भित करता है जो शॉर्ट-टर्म डेटा एक्सेस की अनुमति देता है। आप इस कंपोनेंट को DRAM, या डायनेमिक रैंडम-एक्सेस मेमोरी के रूप में पहचान सकते हैं। आपका कंप्यूटर अपनी शॉर्ट-टर्म मेमोरी में संग्रहीत डेटा को एक्‍सेस कर कई कार्य करता है। इस तरह के ऑपरेशन के कुछ उदाहरणों में एक डयाक्‍यूमेंट को एडिट करना, एप्लिकेशन लोड करना और इंटरनेट ब्राउज़ करना शामिल है। आपके सिस्टम की स्‍पीड और परफॉर्मेंस आपके कंप्यूटर पर इंस्‍टॉल मेमोरी की साइज पर निर्भर करते है।

आइएं इसे एक उदाहरण से समझते हैं –

यदि आप एक डेस्क पर काम कर रहे हैं और आपके पास एक फाइलिंग कैबिनेट है, तो आप जिस फाइल पर अभी काम कर रहे हैं उस फाइल को कैबिनेट से निकालकर डेस्‍क पर रखेंगे और काम करेंगे। इसी तरह से यह डेस्क आपके कंप्यूटर की मेमोरी का प्रतिनिधित्व करती है। जिन वस्तुओं का आपको तुरंत उपयोग करने की आवश्यकता होगी, उन्हें आसान पहुंच के लिए आपके डेस्क पर रखा जाएगा। हालांकि, इसकी साइज की सीमाओं के कारण डेस्क पर ज्यादा स्टोर नहीं किया जा सकता है।

कंप्यूटर मेमोरी कैसे काम करती है?

यह समझने के लिए कि कंप्यूटर मेमोरी कैसे काम करती है, इस पदानुक्रम पर एक नज़र डालें:

कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपके इनपुट स्रोत क्या हैं, अपने कंप्यूटर को चालू कर रहे हैं या अपने कीबोर्ड पर टाइप कर रहे हैं, यह सभी रिड़-ओन्‍ली मेमोरी (ROM) में जाएगा और सभी कंपोनेंट के काम करने को सुनिश्चित करने के लिए एक पावर-ऑन सेल्फ -टेस्ट (POST) करता है।

फिर, मेमोरी कंट्रोलर मेमोरी एड्रेस की जांच करेगा और यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई त्रुटि नहीं है, एक त्वरित रीड / राइट ऑपरेशन करेगा। वहां से, ROM से एक बेसिक इनपुट/आउटपुट सिस्टम (BIOS) लोड किया जाएगा, सिस्टम ऑपरेटिंग सिस्टम (OS) को हार्ड ड्राइव से सिस्टम की RAM में भी लोड करेगा।

तो मूल रूप से, कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप फ़ाइल लोड कर रहे हैं या सेव कर रहे हैं, यह सब पहले रैम से गुजरेगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि रैंडम-एक्सेस मेमोरी (रैम) सीपीयू द्वारा अनुरोधित सभी अस्थायी डेटा को प्रोसेस करेगी, इसमें से कोई भी डेटा रैम में सेव नहीं होता है। और इसलिए, एक बार एप्लिकेशन बंद होने के बाद, डेटा भी खो जाता है।

कंप्यूटर मेमोरी के कितने प्रकार हैं?

Types of Computer Memory in Hindi

कंप्यूटर मेमोरी के प्रकार:

कंप्यूटर की मेमोरी को दो केटेगरीज में डिवाइड गया है:

1. Primary Memory

  • RAM: SRAM, DRAM
  • ROM: MROM, PROM, EPROM, EEPROM

2. Secondary Memory

  • SDD
  • HDD
  • Flash Drives
  • NAS
  • SAN
  • Cloud Storage

A) Primary Memory in Hindi

प्राइमरी मेमोरी को volatile मेमोरी भी कहां जाता हैं, क्‍योंकि यह मेमोरी डेटा को परमानेंटली स्‍टोर नहीं कर सकती।

यह प्राइमरी मेमोरी में जिस डेटा और इंस्ट्रक्शंस पर कंप्‍यूटर वर्तमान में काम कर रहा होता हैं, वही स्‍टोर होता हैं। इसकी कैपेसिटी लिमिटेड होती हैं और जब कंप्‍यूटर शटडाउन होता हैं तब यह सारा डेटा लॉस्‍ट होता हैं।

यह आमतौर पर सेमीकंडक्टर डिवाइस से बनी होती है। इसका एक अन्य नाम है – रैम (RAM)।

मुख्य मेमोरी की विशेषताएँ

Characteristics of Main Memory in Hindi:

मुख्य मेमोरी के कैरेक्टरिस्टिक:

  • यह मेमोरी सेमीकंडक्टर से बनी होती हैं।
  • इसे main मेमोरी के रूप में जाना जाता है।
  • आम तौर पर volatile मेमोरी होती हैं।
  • पॉवर ऑफ होने पर डेटा लॉस्‍ट हो जाता है।
  • यह कंप्यूटर की वर्किंग मेमोरी है।
  • सेकंडरी मेमोरी से फास्‍ट हैं
  • प्राथमिक मेमोरी के बिना कंप्यूटर चल नहीं सकता।

1. Random Access Memory (RAM)

Computer Memory Hindi

RAM (Random Access Memory) यह CPU की इंटरनल मेमोरी है जो डेटा, प्रोग्राम और प्रोग्राम रिजल्‍ट को स्‍टोर करती है। यह रिड/ राइट मेमोरी है जो जब तक कंप्‍यूटर ऑन हैं, तब तक डेटा को स्टोर करती है।

इस मोमोरी को रैम इसलिए कहां जाता हैं, क्‍योकि इसमें मेमोरी लोकेशन को random सिलेक्‍ट किया जाता हैं। पॉवर ऑफ होने पर इसमें स्‍टोर डेटा लॉस्‍ट हो जाता हैं, इसलिए इसे volatile मेमोरी कहां जाता हैं।

Types of RAM

रैम को निम्न टाइप में केटेगरीज किया गया है

रैम दो टाइप की है –

i) Static RAM (SRAM)

स्‍टैटिक वर्ड यह इंडिकेट करता हैं कि जब तक पॉवर ऑन हैं, तब तक मेमोरी में डेटा को स्‍टोर किया जाता हैं। हालांकि, volatile नेचर के कारण पॉवर ऑफ हो जाने पर डेटा लॉस्‍ट हो जाता है।

SRAM चिप्स, 6-ट्रांजिस्टर के मैट्रिक्स का उपयोग करते हैं और कैपेसिटर नहीं होता। ट्रांजिस्टर को लिकेज को रोकने के लिए बिजली की आवश्यकता नहीं होती है, इसलिए SRAM नियमित रिफ्रेश नहीं होती।

ii) Dynamic RAM (DRAM)

SRAM के विपरीत, DRAM डेटा को मेंटेंन रखने के लिए लगातार रिफ्रेश होती हैं। यह मेमोरी को एक रिफ्रेश सर्किट पर रखकर किया जाता है जो प्रति सेकंड कई सौ बार डेटा को रि-राइट करता है।

DRAM को अधिकांश सिस्टम में यूज किया जाता है क्योंकि यह सस्ता और छोटा है। सभी DRAM मेमोरी सेल्‍स से बने होते हैं, जो एक कपैसिटर और एक ट्रांजिस्टर से बना होता है।

Some Other Types of RAM

कुछ अन्य RAM के टाइप भी हैं:

a) FPM DRAM:

FPM DRAM का मतलब Fast Page Mode Dynamic Random Access Memory हैं। यह मेमोरी परंपरागत DRAM की तुलना में थोड़ी फास्‍ट है।

इस मेमोरी में एक्‍सेस टाइम को इम्‍प्रूव किया गया हैं जैसे की यह मेमोरी के पड़ोसी लोकेशन को एक्‍सेस करने के लिए, रॉ एड्रेसेस को सिर्फ एक बार भेजती हैं।

b) EDO DRAM:

EDO DRAM का मतलब Extended Data Output Dynamic Random Access Memory हैं। यह FPM का इम्‍प्रूव वर्जन हैं, क्‍योकि यह FPM की तुलना में लंबे समय तक वैलिड डेटा को रख सकती है। इस फीचर के कारण, इसे extended out रूप से जाना जाता है।

1993 में इसने FPM DRAM की जगह लेना शुरू कर दिया। यह डेटा इनफॉर्मेशन के 265 bytes को स्‍टोर कर सकती हैं।

c) SDRAM:

SDRAM का मतलब Synchronous Dynamic Random Access Memory हैं। सिंक्रनाइज़ शब्द सिस्टम बस के साथ अपनी सिंक्रनाइज़ेशन फीचर को रेफर करता है।

इस DRAM की तरह एक स्टार्टअप सिक्‍वेन्‍स की आवश्यकता है, हालांकि DRAM में सिग्नल जनरेशन मुश्किल नहीं है। यह EDO DRAM के रूप में दोगुनी फास्‍ट है। SDRAM का उपयोग करने का प्रमुख डिसएडवांटेज में से एक यह है कि यह सिंगल डेटा रेट में काम करती है जो इसे प्रति क्‍लॉक साइकील के लिए केवल एक टास्‍क करने की अनुमति देता है।

d) DDR SDRAM:

DDR का मतलब Double Data Rate है। SDRAM को Single Data Rate SDRAM को अल्टरनेटिव देने के लिए पेश किया गया था। SDRAM की तुलना में इसका स्‍पीड बेहतर है और एनर्जी भी कम लगती हैं।

इस मेमोरी का डेटा ट्रांसफर रेट डबल हैं, क्‍योकि यह क्‍लॉक के दोनो साइड में डेटा भेजने में सक्षम है।

e) DDR2 SDRAM:

Computer Memory Hindi

2003 में, DDR2 SDRAM का जन्म हुआ। यह डबल डाटा रेट टाइप 2 SSDRAM है। यह पहली पीढ़ी से संबंधित DDR SDRAM मेमोरी की डबल स्‍पीड की हैं।

DDR2 का स्‍टैंडर्ड 4oo से 800 या इससे भी ज्यादा के बीच होता है। DDR की तुलना में इसका परफॉरमेंस बेहतर है क्योंकि इसकी इनपुट/आउटपुट बफर वर्जन फ्रिक्‍वेन्‍सी डबल है।

f) DDR3 SDRAM:

Computer Memory Hindi

DDR3 SDRAM मेमोरी का मतलब Double Data Rate Type 3 Synchronized Dynamic Random Access Memory हैं। इसे सन 2007 में पेश किया गया था। यह DDR2 का इम्प्रूव वर्जन हैं, क्‍योकि इसका स्‍पीड DDR2 की तुलना में डबल हैं और पॉवर खपत भी कम हैं।

यह वही है जो वर्तमान के बाजार में प्रचलित है। हालांकि, जल्द ही DDR4 द्वारा इसे रिप्‍लेस किया जा सकता है। इसका ट्रांसफर रेट 800 से 1600 Mbps तक होता है।

g) DDR4 SDRAM:

Computer Memory Hindi

DDR4 SDRAM का मतलब Double Data Rate Type 4 Synchronous Dynamic Random Access Memory हैं। इसका स्‍पीड DDR3 की तूलना में हाई हैं। इस फिल्‍ड में यह नया वर्जन हैं।

यह बेहतर सिस्‍टम लेवल रिलायबिलिटी, कैपेसिटी, परफॉरमेंस स्कलेबिलिटी, पावर एफिशिएंसी DDR3 की तूलना में बेहतर हैं।

2) ROM

ROM का Read-Only Memory है, और नाम इस तथ्य से उपजा है कि इस प्रकार की कंप्यूटर मेमोरी से डेटा को पढ़ा जा सकता है, लेकिन डेटा को सामान्य रूप से नहीं लिखा जा सकता है। यह एक बहुत तेज़ प्रकार की कंप्यूटर मेमोरी है जो आमतौर पर मदरबोर्ड पर सीपीयू के पास इंस्‍टॉल होती है।

ROM एक प्रकार की नॉन-वोलेटाइल मेमोरी है, जिसका अर्थ है कि ROM में संग्रहीत डेटा तब भी मेमोरी में बना रहता है, जब उसमें कोई पॉवर नहीं होती है – उदाहरण के लिए जब कंप्यूटर बंद हो जाता है। इस लिहाज से यह सेकेंडरी मेमोरी के समान है, जिसका इस्तेमाल लॉन्ग टर्म स्टोरेज के लिए किया जाता है।

जब एक कंप्यूटर ऑन होता है, तो सीपीयू कम्युनिकेट में मदद करने के लिए ड्राइवरों या अन्य जटिल सॉफ़्टवेयर की आवश्यकता के बिना रोम में स्‍टोर जानकारी को पढ़ना शुरू कर सकता है। ROM में आमतौर पर “बूटस्ट्रैप कोड” होता है, जो निर्देशों का मूल सेट होता है, जिसे कंप्यूटर को सेकेंडरी मेमोरी में संग्रहीत ऑपरेटिंग सिस्टम के बारे में जागरूक होने के लिए और ऑपरेटिंग सिस्टम के कुछ हिस्सों को प्राथमिक मेमोरी में लोड करने की आवश्यकता होती है ताकि यह शुरू हो सके और उपयोग के लिए तैयार हो जाए।

फर्मवेयर को स्टोर करने के लिए ROM का उपयोग सरल इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में भी किया जाता है जो डिवाइस के स्विच ऑन होते ही चलता है।

Types of ROM:

i) PROM (Programmable Read Only Memory)

PROM केवल रिड-ओन्‍ली मेमोरी है जिसे यूजर द्वारा केवल एक बार मॉडिफाइड किया जा सकता है। यूजर ब्‍लैंक PROM खरीदता है और फिर इसमें अपने कंटेंट को PROM program की मदद से भरता हैं।

PROM चिप के अंदर, छोटे फ़्यूज़ होते हैं जो प्रोग्रामिंग के दौरान प्रज्वलित होते हैं। इसे केवल एक बार प्रोग्राम किया जा सकता है और यह मिटता नहीं है।

ii) EPROM (Erasable and Programmable Read Only Memory)

EPROM को अल्ट्रा-वायलेट लाइट में 40 मिनट तक एक्‍सपोज करके मिटा सकता है। आमतौर पर, यह एक EPROM इरेज़र से यह फ़ंक्शन प्राप्त किया जा है।

यह प्रोग्रामेबल रीड-ओनली मेमोरी है जिसे इरेज किया जा सकता है और पुनः उपयोग किया जा सकता है।

iii) EEPROM (Electrically Erasable and Programmable Read Only Memory)

EEPROM को प्रोग्राम और इरेज किया जा सकता हैं। इसे दस हज़ार बार मिटाया और रि-प्रोग्राम किया जा सकता हैं। दोनों इरेजिंग और प्रोग्रामिंग को लगभग 4 से 10ms (millisecond) लगते हैं।

EEPROM में, किसी भी लोकेशन को सिलेक्‍ट कर इरेज और प्रोग्राम किया जा सकता है।

3 विंडोज बिल्ट -इन टूल्स जिनकी मदद से आप चेक कर सकेंगे मेमोरी यूसेज को चेक

B) Secondary Memory in Hindi

Secondary Memory in Hindi

सेकेंडरी मेमोरी बड़ी मात्रा में डेटा रखने के लिए एक स्थायी स्‍टोरेज स्थान है। सेकेंडरी मेमोरी को एक्‍सटर्नल मेमोरी के रूप में भी जाना जाता है जो विभिन्न स्टोरेज मीडिया (हार्ड ड्राइव, यूएसबी, सीडी, फ्लैश ड्राइव और डीवीडी) का प्रतिनिधित्व करती है, जिस पर कंप्यूटर डेटा और प्रोग्राम को दीर्घकालिक आधार पर सेव किया जा सकता है। हालाँकि, यह मुख्य मेमोरी की तुलना में सस्ती और धीमी है।

प्राइमरी मेमोरी के विपरीत, सेकेंडरी मेमोरी को सीपीयू द्वारा सीधे एक्सेस नहीं किया जा सकता है। इसके बजाय, सेकेंडरी मेमोरी डेटा को पहले रैम (रैंडम एक्सेस मेमोरी) में लोड किया जाता है और फिर डेटा को पढ़ने और अपडेट करने के लिए प्रोसेसर को भेजा जाता है। सेकेंडरी मेमोरी डिवाइस में हार्ड डिस्क और फ्लॉपी डिस्क जैसे मैग्‍नेटिक डिस्क, सीडी और सीडीरॉम जैसे ऑप्टिकल डिस्क और मैग्‍नेटिक टेप भी शामिल हैं।

सेकेंडरी मेमोरी की विशेषताएं

  • इसकी स्पीड प्राइमरी/मेन मेमोरी से धीमी होती है।
  • नॉन- वोलेटाइल प्रकृति के कारण स्टोर डेटा खो नहीं सकता है।
  • यह विभिन्न प्रकार के बड़े संग्रहों को संग्रहीत कर सकता है, जैसे कि ऑडियो, वीडियो, पिक्‍चर, टेक्‍स्‍ट, सॉफ्टवेयर, आदि।
  • सेकंडरी मेमोरी में संग्रहीत सभी डेटा खो नहीं सकता क्योंकि यह एक स्थायी स्‍टोरेज क्षेत्र है; यहां तक ​​कि बिजली बंद होने पर भी।
  • इसमें डेटा स्टोर करने के लिए विभिन्न ऑप्टिकल और मैग्‍नेटिक मेमोरी हैं।

सेकेंडरी मेमोरी के प्रकार

Types of Secondary Memory in Hindi

सेकेंडरी मेमोरी डिवाइस के प्रकार निम्नलिखित हैं:

1. हार्ड डिस्क

हार्ड डिस्क कंप्यूटर का स्थायी स्टोरेज डिवाइस है। यह एक नॉन-वोलेटाइल डिस्क है जो स्थायी रूप से डेटा, प्रोग्राम और फ़ाइलों को स्‍टोर करता है, और कंप्यूटर के पावर सोर्स के बंद होने पर स्टोर डेटा नहीं खो सकता।

आमतौर पर, यह कंप्यूटर के मदरबोर्ड पर इंटरनली स्थित होता है जो एक एयर-सील्ड केसिंग के अंदर एक या अधिक कठोर फास्‍ट रोटेटिंग डिस्क प्लैटर्स का उपयोग करके डेटा को स्‍टोर और रिट्रिव करता है। यह एक बड़ा स्टोरेज डिवाइस है, जो हर कंप्यूटर या लैपटॉप पर इंस्टॉल किए गए सॉफ्टवेयर, म्यूजिक, टेक्स्ट डॉक्यूमेंटेशन, वीडियो, ऑपरेटिंग सिस्टम और डेटा को स्थायी रूप से स्टोर करने के लिए पाया जाता है, जब तक कि यूजर डिलीट नहीं करता।

2. सीडी (कॉम्पैक्ट डिस्क)

सीडी एक ऑप्टिकल डिस्क स्टोरेज डिवाइस है, CD का मतलब कॉम्पैक्ट डिस्क है। यह एक स्टोरेज डिवाइस है जिसका उपयोग विभिन्न प्रकार के डेटा जैसे ऑडियो, वीडियो, फाइल, ओएस, बैक-अप फाइल और कंप्यूटर के लिए उपयोगी किसी भी अन्य जानकारी को स्टोर करने के लिए किया जाता है।

सीडी की चौड़ाई 1.2 मिमी और ऊंचाई 12 सेमी है, जो लगभग 783 एमबी डेटा साइज को स्टोर कर सकती है। यह सीडी से डेटा पढ़ने और लिखने के लिए लेजर लाइट का उपयोग करता है।

सीडी के प्रकार

  1. CD-ROM (Compact Disc Read Only Memory): इसका उपयोग मुख्य रूप से ऑडियो सीडी, सॉफ्टवेयर और कंप्यूटर गेम जैसे बड़े साइज के डेटा को को मैन्‍युफैक्‍चर करते समय स्‍टोर करने लिए किया जाता है। यूजर डिस्क से केवल डेटा, टेक्स्ट, संगीत, वीडियो पढ़ सकते हैं, लेकिन वे इसे मॉडिफाइ नहीं कर सकते।
  2. CD-R (Compact Disc Recordable): यूजर द्वारा एक बार लिखने के लिए उपयोग की जाने वाली कॉम्पैक्ट डिस्क का प्रकार; उसके बाद, इसे मॉडिफाइ या मिटाया नहीं जा सकता है।
  3. CD-RW (Compact Disc Rewritable): यह एक रीराइटेबल सीडी डिस्क है, जिसे अक्सर स्‍टोर डेटा को लिखने या डिलिट करने के लिए उपयोग किया जाता है।

3. डीवीडी ड्राइव/डिस्क

DVD एक ऑप्टिकल डिस्क स्टोरेज डिवाइस है, जिसका मतलब डिजिटल वीडियो डिस्प्ले या डिजिटल वर्सेटाइल डिस्क है। यह एक सीडी के आकार के समान है लेकिन एक कॉम्पैक्ट डिस्क की तुलना में बड़ी मात्रा में डेटा स्‍टोर कर सकता है।

इसे 1995 में Sony, Panasonic, Toshiba और Philips चार इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों द्वारा विकसित किया गया था। DVD ड्राइव को तीन प्रकारों में विभाजित किया जाता है, जैसे DVD ROM (रीड ओनली मेमोरी), DVD R (रिकॉर्डेबल) और DVD RW (रीराइटेबल या इरेज़ेबल)। यह ऑडियो, वीडियो, इमेज, सॉफ्टवेयर, ऑपरेटिंग सिस्टम इत्यादि जैसे कई डेटा फॉर्मेट को स्टोर कर सकता है। डीवीडी में डेटा की स्‍टोरेज क्षमता 4.7 जीबी से 17 जीबी है।

4. ब्लू रे डिस्क (बीडी)

ब्लू रे एक ऑप्टिकल डिस्क स्टोरेज डिवाइस है जिसका उपयोग बड़ी मात्रा में डेटा या वीडियो रिकॉर्डिंग की हाई डेफिनेशन और अन्य मीडिया फ़ाइलों को चलाने के लिए किया जाता है। यह ब्लू-रे डिस्क के संग्रहीत डेटा को पढ़ने के लिए लेजर तकनीक का उपयोग करता है। यह सीडी/डीवीडी की तुलना में अधिक घनत्व पर अधिक डेटा स्टोर कर सकता है। उदाहरण के लिए, कॉम्पैक्ट डिस्क हमें 700 एमबी डेटा स्टोर करने की अनुमति देती है, और डीवीडी में, यह 8 जीबी तक स्टोरेज क्षमता प्रदान करती है, जबकि ब्लू-रे डिस्क डेटा स्टोर करने के लिए 28 जीबी स्पेस प्रदान करती है।

5. पेन ड्राइव

पेन ड्राइव एक पोर्टेबल डिवाइस है जिसका उपयोग स्थायी रूप से डेटा स्टोर करने के लिए किया जाता है और इसे यूएसबी फ्लैश ड्राइव के रूप में भी जाना जाता है। यह आमतौर पर USB पोर्ट का उपयोग करके कंप्यूटर से जुड़े डेटा को स्टोर और ट्रांसफर करने के लिए उपयोग किया जाता है।

इसमें डेटा स्टोर करने के लिए कोई चलने योग्य हिस्सा नहीं है; यह एक इंटिग्रेडेट सर्किट चिप का उपयोग करता है जो डेटा स्‍टोर करता है। यह यूजर्स को एक कंप्यूटर से किसी भी USB पेन ड्राइव में डेटा जैसे ऑडियो, वीडियो, चित्र आदि को स्‍टोर करने और ट्रांसफर करने की अनुमति देता है। पेन ड्राइव की स्टोरेज कैपेसिटी 4 जीबी से 256 जीबी या इससे ज्यादा है।

लेटेस्ट आर्टिकल्स

अधिक एक्स्प्लोर करें

1 COMMENT

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.